बिलासपुर. नसबंदी कांड में डॉ. आरके गुप्ता को हाईकोर्ट से जमानत मिलने डॉक्टर को गलत ढंग से आरोपी बनाए जाने पर कोर्ट की टिप्पणी के बाद पुलिस आगे कार्रवाई को लेकर असमंजस में है। नसबंदी में शामिल डाॅक्टर की टीम के सदस्यों को आरोपी बनाएं या बनाएं यह तय नहीं कर पा रहे हैं। बुधवार को आईजी पवन देव ने जांच टीम को अपने दफ्तर बुलाकर इस मसले पर विचार-विमर्श किया।
नसबंदी कांड में बिना जांच रिपोर्ट जल्दबाजी में डाॅ. आरके गुप्ता को धारा 304 भाग दो 308 के तहत आरोपी बनाने पर पुलिस पशोपेश में है। एफआईआर में आरोपियों में डाॅ. गुप्ता के साथ उसकी टीम का जिक्र है। डॉक्टर की गिरफ्तारी के बाद जब तक बाकी पर कार्रवाई होती, आॅपरेशन में गड़बड़ी के बजाए दवा को मौत का कारण माना जाने लगा। पुलिस ने आगे की कार्रवाई रोक दी थी पर फजीहत से बचने पुलिस डाॅक्टर को आरोपी साबित करने उसके खिलाफ सबूत इकट्ठा करने में जुटी रही। टीम के बाकी लोगों के भी बयान लिए गए कि शिविर में क्षमता से अधिक महिलाओं की नसबंदी हुई और ऑपरेशन के दौरान वहां अव्यवस्था थी। इसी बीच डाॅ. गुप्ता को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। कोर्ट ने डॉक्टर को आरोपी बनाने के लिए भी पुलिस पर टिप्पणी की है। ऐसे में पुलिस अब दुविधा में है। इधर जहरीली दवा मामले में फार्मेसी संचालक भी गिरफ्तार हो चुके हैं।
कार्रवाई गलत हो इसलिए रिपोर्ट का खुलासा नहीं
पुलिस ने बिसरा रिपोर्ट का खुलासा नहीं किया पर उसमें जहर होने की पुष्टि सरकार भी कर चुकी है। पुलिस खुलासा करती तो उसकी पहले की कार्रवाई गलत साबित हो जाती। पुलिस पहले ही नसबंदी में गड़बड़ी को मौत का कारण मानकर कार्रवाई कर चुकी थी।
आईजी पवन देव ने जांच टीम सदस्यों से गिरफ्तारी पर रोक लगाने बाकी जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं। बिसरा रिपोर्ट से जहर की पुष्टि हो चुकी है पर जहर उन्हीं दवाओं का है यह प्रमाणित नहीं हुआ।
कोलकाता लैब से रिपोर्ट आने के बाद तय होगा, तब तक पुलिस को राहत है।