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- बिहार, झारखंड और उत्तरप्रदेश से अंबिकापुर के रास्ते न्यायधानी पहुंच रहे अवैध हथियार
बिहार, झारखंड और उत्तरप्रदेश से अंबिकापुर के रास्ते न्यायधानी पहुंच रहे अवैध हथियार
न्यायधानीमें ऐसे कई इलाके हैं, जहां दो से तीन हजार रुपए में अवैध कट्टे मिल रहे हैं। एक लाख रुपए में विदेशी पिस्टल भी उपलब्ध हैं। उत्तरप्रदेश, बिहार से अंबिकापुर के रास्ते यहां तक हथियारों की सप्लाई हो रही है। मंगलवार को पकड़ा गया गिरोह उत्तरप्रदेश के लखनऊ से फर्जी लाइसेंस बनवाता था और बिहार के छपरा से बंदूकों की सप्लाई करता था। अब तो झारखंड और उत्तराखंड से भी हथियार पहुंचने लगे हैं। सड़क और रेल मार्ग से इसके एजेंट सामान्य झोले में कट्टे-पिस्टल लेकर शहर आते हैं और बदमाशों तक पहुंचा देते हैं। इसी का खामियाजा है कि बदमाश अब कट्टा अड़ाकर संगीन अपराधों को अंजाम दे रहे हैं।
कुछ दिन पहले तोरवा में कट्टा अड़ाकर लूट की घटना को अंजाम दिया गया। आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। रतनपुर में डकैती की योजना बनाते हुए आठ लोगों को पुलिस ने पकड़ा था। उनके पास पांच कट्टे जब्त किए गए थे। शराब माफियाओं के पंडों के बीच गैंगवारी ने भी अवैध हथियारों की तस्करी को बढ़ावा दिया। आरोपियों से पूछताछ में पुलिस को पता चला कि बिहार, झारखंड और उत्तरप्रदेश से हथियार यहां पहुंचाए जा रहे हैं। इसके बाद भी किसी मामले में पुलिस ने तह तक जाकर सप्लायर को पकड़ने की कोशिश नहीं की। आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई कर अपना कर्तव्य पूरा समझ लिया। गौरतलब है कि जिले में पिछले साल आर्म्स एक्ट के 72 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें 53 शहर के हैं। पिछले सालों की तुलना में यह आंकड़ा 30 से 35 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है।
{2005- कोनी में 15 पिस्टल, 100 कारतूस। {जुलाई 2008- स्टेशन से डकैत पुष्पेंद्र चौहान के पास 2 पिस्टल, 2 रिवाॅल्वर, 1 कट्टा, 95 कारतूस। {11 अप्रैल 2012- दयालबंद में शराब ठेकेदार के पंडों से 3 कट्टे, 58 कारतूस, 8 तलवार, एक गंडासा जब्त।
अब तक पकड़े गए हैं
ज्यादातर लोग जान काे खतरा बताकर मांगते हैं लाइसेंस
ज्यादातरलोग अपनी और अपनों की जान को खतरा बताकर लाइसेंस का आवेदन लगाते हैं। पुलिस लाइसेंस ले चुके लोगों से कभी पूछताछ नहीं करती कि इनका इस्तेमाल कहां और कैसे किया जा रहा है। शौकिया तौर पर दो से ढाई लाख रुपए तक की इटेलियन बेल्जियम पिस्टल और माउजर रखने वाले भी शहर में हैं।
बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर निगरानी की पुख्ता व्यवस्था नहीं
बिलासपुररेलवे स्टेशन हो या फिर बस स्टैंड, शहर में क्या सामान ला