- Hindi News
- रेलवे में बीमार पिता की नौकरी पूरी करता है बेटा
रेलवे में बीमार पिता की नौकरी पूरी करता है बेटा
वहरोजाना सुबह 6 बजे बीमार पिता जो अब आंखों की रोशनी और कानों की शक्ति खोते जा रहे हैं, काे अपनी साइकिल पर बैठाकर रेलवे दफ्तर ले जाता है। यहां पिता हाजिरी रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज करवाते हैं, इसके बाद दोनों ड्यूटी करने फील्ड में निकल जाते हैं। दिनभर पिता के हिस्से का काम निपटाने के बाद फिर दोनों घर की राह पकड़ लेते हैं। इसी तरह सात साल हो गए, रेलवे में मुलाजिम बेलूराम और उसके बेटे राजेश को। रोजी-रोटी की खातिर किए गए इस एडजस्टमेंट को रेल प्रशासन की भी मौखिक सहमति है।
रेलवे में सफाई कर्मचारी बेलूराम भौरेल पिता होरीलाल 58 वर्ष की आंखों की रोशनी कमजोर पड़ गई है। अब उसे सुनाई भी नहीं देता। विभाग की ओर से अनफिट घोषित नहीं करने की वजह से वह ड्यूटी पर जाता है, लेकिन उसके हिस्से का काम बेटा राजेश 30 वर्ष करता है। राजेश रोजाना सुबह करीब 6 बजे पिता को साइकिल पर बैठाकर रेलवे अस्पताल स्थित उसके आॅफिस आता है। यहां ड्यूटी लगाने वाला अफसर बेलूराम से ड्यूटी रजिस्टर में साइन करवाता है।
अब देखिए, इनका रवैया
साॅरी,इसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।
राजेंद्रबिरदा, चीफहैल्थ इंस्पेक्टर, रेलवे
पिता की जगह नाली की सफाई करता राजेश।
इसलिए शादी करने को तैयार नहीं
बेटेके मन में मां-पिता के लिए बड़ी श्रद्धा है। ऐसे में राजेश ने जितने भी शादी के रिश्ते आए, ठुकरा दिए। उसका कहना है कि शादी कर जिसे लाएगा, उस जीवन संगिनी की जिम्मेदारी पूरी नहीं कर पाया तो ठीक नहीं होगा। यह उसके साथ अन्याय होगा, इसलिए अभी इस बारे में विचार करना छोड़ दिया है।
बेटे को नहीं दे सकते नौकरी
रेलवेके नियमानुसार पूरी तरह मेडिकली अनफिट नहीं हाेने तक खुद को ही काम करना होता है। सफाई कर्मचारी अपने बच्चों को नौकरी नहीं दे सकता। अगर पूरी तरह अनफिट हो जाते हैं तब उन्हें आराम दे दिया जाता है। उनके रिटायरमेंट के समय तक पूरा भुगतान किया जाता है। इस केस में हो सकता है सुपरवाइजर ने मानवता के नाते कर्मचारी को यह सुविधा दी होगी। आरकेअग्रवाल, सीपीआरओएसईसीआर