कानन के नीलगाय की टीबी से मौत
काननपेंडारी स्मॉल जू में सोमवार को नर नीलगाय की मौत हो गई। इस घटना से एक बार फिर जू के वन्यप्राणियों की देख-रेख और चिकित्सकीय सेवाएं कटघरे में खड़ी हुई हैं। जू में वन्यप्राणियों की होने वाली मौतों की लंबी फेहरिश्त है। नीलगाय की मौत की वजह ट्यूबरकूलोसिस की बीमारी बताई गई है। पिछले छह महीने से उसका इलाज किया जा रहा था। नीलगाय के जोड़े को डेढ़ साल पहले रायपुर के नंदन वन से लाया गया था। नर की सेहत भली-चंगी थी, लेकिन कानन पहुंचने के बाद उसे टीबी की बीमारी लग गई।
नीलगाय का जोड़ा जनवरी 2013 में रायपुर के नंदन वन से लाया गया था। बीमार नीलगाय का इलाज कर रहे डाॅ. पीके चंदन ने बताया कि इंसानों में टीबी की बीमारी का भले ही इलाज हो सकता है, लेकिन वन्यप्राणियों में अब तक यह बीमारी लाइलाज है। इससे पीड़ित वन्यप्राणी में प्रोटिनिनिया यानी प्रोटीन की कमी हो जाती है। हर्बी बोर (शाकाहारी) के वन्यप्राणियों में इसकी भरपाई मुश्किल होती है। लंबे इलाज के बाद आखिर नीलगाय को बचाया नहीं जा सका। पोस्टमाॅर्टम में टीबी की बीमारी का फैलाव लंग्स, लीवर हार्ट में पाया गया। इसके सैंपल जांच के लिए आईवीआरआई बरेली भेजे जाएंगे। नीलगाय को वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-3 में रखा गया है। जू के नियमों के मुताबिक उसका शव अधीक्षक आरके गजभिए अन्य अफसरों की मौजूदगी में जला दिया गया। गौरतलब है कि कानन में 22 मादा चीतलों की मौत के मामले में रहस्य का पर्दा अब भी नहीं खुला है, क्योंकि आईवीआरआई बरेली ने अपनी जांच रिपोर्ट में एंथ्रेक्स से चीतलों की मौत के तथ्य को सिरे से खारिज कर दिया है।
कामधेनु वेटनरी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों की टीम ने चीतलों की मौत की वजह एंथ्रेक्स को बताया था, जिसके चलते जू को करीब महीने भर बंद रखना पड़ा था।
डाॅक्टर-ड्रेसर की मांग, 26 क्लोज सर्किट कैमरे लगेंगे
डीएफओमसीह के मुताबिक, जू में नियमित चिकित्सक के अलावा डाॅ. पीयूष दुबे की सेवाएं ली जाती हैं। डाॅक्टर दो ड्रेसर की नियुक्ति की मांग शासन से की गई है। सभी 54 प्रजातियों के वन्यप्राणियों की नियमित माॅनिटरिंग के लिए 26 क्लोज सर्किट कैमरे लगाने के लिए पीसीसीएफ से मंजूरी मांगी गई है। वर्तमान में जू में सीमित संख्या में कैमरे लगाए गए हैं, जिनसे मुख्य द्वार टाइगर, लायन चीतलों के एनक्लोजर की निगरानी की जाती है।
रायपुर से