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पीजीडीसीए के नियमों में बीयू की ही चलेगी
बिलासपुरयूनिवर्सिटी ने पूर्व में एलएलबी में एडमिशन के लिए उम्र सीमा में छूट और पीजीडीसीए में 50 फीसदी की जगह 40 फीसदी करने का निर्णय लिया था। यूनिवर्सिटी ने एलएलबी वाले निर्णय को तो यथावत रखा है लेकिन पीजीडीसीए में एडमिशन के लिए प्रतिशत में छूट को फिर से पलट दिया है। पीजीडीसीए में अब फिर से 50 फीसदी अंक पाने वाले स्टूडेंट को प्रवेश मिल सकेगा।
अगले सत्र से एलएलबी स्टुडेंट के लिए यह राहत की बात है कि एडमिशन के लिए पूर्व योग्यता को संशोधित किया जा रहा है। एलएलबी में एडमिशन के उम्र सीमा पहले 27 वर्ष थी। रिजर्व केटेगरी के लिए इसमें पांच साल की छूट थी। कुछ समय पहले बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने उम्र सीमा को खत्म कर दिया है। यूनिवर्सिटी में इस मापदंड को बगैर कार्यपरिषद कोआर्डिनेशन कमेटी में लाए बिना लागू नहीं किया जा सकता था। अब कार्यपरिषद और कोआर्डिनेशन कमेटी में लाने के बाद एलएलबी में एडमिशन के लिए कोई उम्र सीमा नहीं होगी। दूसरी ओर बीयू ने पीजीडीसीए में एडमिशन के लिए भी छूट की कवायद की थी लेकिन यह निर्णय दो-तीन दिनों के अंदर ही पलट दिया गया।
दैवेभो कर्मियों को बना दिया श्रमिक
यूनिवर्सिटीकी स्थापना के बाद से ही कई कर्मचारियों को बतौर दैनिक वेतन भोगी पद पर रखा गया था। यूनिवर्सिटी ने अब इन्हें दैवेभो की जगह अकुशल श्रमिक का नाम दिया है। इससे काम करने वाले कर्मचारियों में नाराजगी है और वे यूनिवर्सिटी के इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं। इधर यूनिवर्सिटी के फाइनेंस अधिकारी राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि इन कर्मचारियों को काेई पद नहीं है। इन्हे पूर्व में भी कलेक्टर दर से पारिश्रमिक दिया जा रहा था और अब भी वही किया जा रहा है।