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अड़ंगेबाजी में फंस गई सिलपहरी सड़क

7 वर्ष पहले
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वनविभाग की अड़ंगेबाजी से सिलपहरी से बरगवां पहुंच मार्ग बन नहीं पाया है। इस पथरीले, जर्जर मार्ग से ग्रामीण आना-जाना करते हैं। वन विभाग अनापत्ति दे दे तो इस मार्ग से होकर पेण्ड्रा से मरवाही की दूरी 32 किलोमीटर हो जाएगी। अभी राजमार्ग होकर पेण्ड्रा से मरवाही की दूरी 40 किलोमीटर है।

वन विभाग सहित आरईएस पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की लापरवाही, उनमें सामंजस्य के अभाव में मरवाही-पेण्ड्रा विकासखंड के कई गांव अाज भी कच्ची, डब्ल्यूबीएम सड़काें से जुड़े हैं जो पथरीली, जर्जर हैं। ऐसी ही स्थिति सिलपहरी से बरगवां पहुंच मार्ग की है। वन क्षेत्र के बीच से होकर जाने से वन विभाग ने इसमें अड़ंगा लगा दिया है। पेण्ड्रा-मरवाही के लगभग 10 गांवों को मरवाही ब्लाॅक मुख्यालय से जोड़ने वाली यह सड़क मरवाही की लाइफलाइन बन सकती है बशर्ते वन विभाग इसके लिए अनापत्ति दे। इस मार्ग पर बड़ी-बड़ी गिट्टियां बिखरी हुई हैं, पानी के कटाव से सड़क कई जगह से कट गई है, कई जगह सिर्फ मिट्टी की सड़क है। सिलपहरी बरगवां ग्राम पंचायत ने इस पर 30 साल पहले किश्त-किश्त में डब्ल्यूबीएम का काम कराया था। उसके बाद से इस सड़क पर कभी मुरम तक नहीं डाला गया, इससे गिट्टी उखड़ गई है।

फिर भी पेण्ड्रा से बरगवां, भरीडांड, अमेराटिकरा, मटियाडांड, पीपरडोल इसके आस-पास गांवों के ग्रामीण इसी से आवागमन करते हैं। मरवाही विकासखंड के सीमावर्ती गांव जो पेण्ड्रा विकासखंड की सीमा में हैं जैसे अण्डी, मजगवां, सिलपहरी, लटकोनीखुर्द, घोरदेवा, नगवाही इसके अगल-बगल के गांवों के ग्रामीणों के लिए मरवाही ब्लाॅक मुख्यालय जाने का यह निकटतम मार्ग है। इस पर बड़ी संख्या में दुपहिया वाहन चलते हैं। जर्जर मार्ग हाेने से लोग दुर्घटना का शिकार होते हैं। पेण्ड्रा से दुबटिया-सेवरा-अंडी-घोरदेवा-सिलपहरी-बरगवां-पीपरडोल होकर मरवाही की दूरी 32 किलोमीटर है जबकि राजमार्ग पेण्ड्रा-कोटमी होकर मरवाही की दूरी 40 किलोमीटर है। ग्राम लटकोनीखुर्द के सरपंच भागवत सिंह मार्को ने विधायक अमित जोगी से मांग की है कि सिलपहरी-बरगवां मार्ग पूरा कराएं ताकि क्षेत्र के ग्रामीणों को लाभ मिल सके।

सेंवरा-अंडी सड़क डब्ल्यूबीएम तक नहीं बन सकी

सेंवरासे अंडी मजगवां से अंडी आज तक डब्ल्यूबीएम सड़क से नहीं जुड़ पाई है जबकि मरवाही विकासखंड के दर्जनों गांव इस मार्ग होकर पेण्ड्रा से जुड़े हुए हैं। इन गांव