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पुल बनवाने आठ माह बाद भी नहीं हो सकी रॉक टेस्टिंग
लमेरनाला में पुल निर्माण से पहले की जाने वाली रॉक टेस्टिंग में ठेकेदार दिलचस्पी नहीं ले रहा है। बार-बार मौखिक आदेश देने के बाद अब ईई ने ठेकेदार को नोटिस देकर तत्काल काम शुरू करने के लिए कहा है। उसे टेंडर निरस्त करने की चेतावनी भी दी गई है।
तुर्काडीह पुल बंद होने के कारण बिलासपुर से भैंसाझार होते हुए रतनपुर तक जाने वाली सड़क का महत्व और बढ़ गया है। तुरकाडीह से 26वें किलोमीटर में लमेर नाला है। यह नाला इस सड़क के लिए सबसे बड़ी बाधा है। इसकी वजह से यह सड़क छह महीने तक यातायात के लिए बंद रहता है। लोक निर्माण विभाग की यह सड़क लगभग एक साल पहले तैयार हुई है, लेकिन इस पर लमेर नाला पैबंद की तरह है। तुरकाडीह बंद होने के बाद रतनपुर जाने के लिए यह सड़क महत्वपूर्ण हो जाती है। नाला के चलते बारिश के मौसम में इस सड़क का उपयोग नहीं हो पा रहा है। 10 महीने पहले लोक निर्माण विभाग ने इस नाले पर पुल बनवाने का निर्णय लिया है। प्रस्ताव बनाने के लिए सबसे अावश्यक मिट्टी और जमीन के नीचे की रॉक टेस्टिंग होती है। इसके परीक्षण के लिए आठ महीने पहले लोक निर्माण विभाग के बिलासपुर डिवीजन ने 1 लाख 28 हजार रुपए का टेंडर जारी किया। इसे एसके इंटरप्राइजेज नामक कंस्ट्रक्शन कंपनी ने लिया।
आठ महीने बाद भी कंपनी ने काम शुरू नहीं किया। इस दौरान लगातार कंपनी के संचालक को निर्देशित किया गया लेकिन उसने काम शुरू नहीं किया। बिलासपुर डिवीजन के ईई आरके खाम्बरा ने कंपनी संचालक को नोटिस जारी कर काम तत्काल शुरू करने को कहा है।
कंपनी के संचालक को चेतावनी दी है
लमेरनाला में पुल का निर्माण जरूरी है। इसलिए मिट्टी और रॉक टेस्टिंग के लिए टेंडर जारी किया गया था। बारिश खत्म हुए चार महीने बीत चुके हैं फिर भी कंपनी के संचालक ने काम शुरू नहीं किया है। उसे चेतावनी दी गई है। उसने जल्द काम शुरू करने को कहा है। ऐसा नहीं हुआ तो टेंडर निरस्त किया जा सकता है। -आरकेखाम्बरा, ईई,बिलासपुर डिवीजन
लमेर नाला में जिस स्थान पर पुल का निर्माण होना है। वह स्थान अरपा नदी से महज एक किलोमीटर की दूरी पर है। इसलिए भी परीक्षण आवश्यक है। मिट्टी के अलावा जमीन के नीचे कहां तक रेत, कितनी गहराई में मिट्टी कितनी गहराई में पत्थर है इसकी जांच आवश्यक है। मिट्टी का किस्म और पत्थर की मजबूती और थिकनेस कितनी है यह जानना भी जरूरी है।