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- पांच साल में बदल नहीं पाए व्यवस्था, आबादी वाले इलाकों में धड़ल्ले से चल रही हैं फैक्टरियां
पांच साल में बदल नहीं पाए व्यवस्था, आबादी वाले इलाकों में धड़ल्ले से चल रही हैं फैक्टरियां
शहर में आबादी के बीच कई ऐसी फैक्टरियां और काम चल रहे हैं, जिनसे नागरिकों को परेशानी होती है। उद्योग विभाग के नियमानुसार आरा मिल, बैटरी बनाने की फैक्टरी हों या फिर इस तरह के अन्य कारखाने, रिहायशी इलाकों में नहीं चलाए जा सकते। करीब पांच साल पहले जिला प्रशासन ने ऐसे 38 उद्योग तय कर शहर में इन्हें चिन्हांकित किया था। इन्हें आबादी से बाहर किया जाना था, लेकिन प्रशासन की बाकी प्लानिंग की तरह इस पर अमल नहीं हो सका। नतीजा, कभी भारी वाहनों की आवाजाही तो कभी एसिड और हानिकारक कैमिकल से लेकर साउंड पॉल्यूशन तक से आम नागरिक परेशान हो रहे हैं।
कुटीर या लघु उद्योग का लाइसेंस लेकर शहर के भीतर बड़े कारखाने धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं। कई में अवैध काम हो रहे हैं। रहवासी शिकायत करते हैं लेकिन प्रशासन अनसुना कर देता है। इसका खामियाजा उन क्षेत्रों में रहने वालों को उठाना पड़ रहा है। हालत यह है कि शहर में कहीं बैटरी बनाने वाली यूनिट लग गई है तो कहीं फेब्रिकेशन का काम हो रहा है। इनमें से कई तो घातक श्रेणी की हैं, जैसे बैटरी और सोना-चांदी व्यवसायियों के यहां एसिड इस्तेमाल होता है। प्लास्टर आॅफ पेरिस से प्रतिमाएं बनाने वाले सीसा मिश्रित घटिया रंग का इस्तेमाल करते हैं। इतना होने के बाद भी जिला प्रशासन की उदासीनता सवाल खड़े करती है। ऐसे उद्योगों के संचालकों ने पर्यावरण विभाग की स्वीकृति भी नहीं ली है।
मोपका ग्राम पंचायत में शनि मंदिर के पीछे स्टेबलाइजर आैर टीवी एंटीना बनाने वाली शारदा प्रोडक्ट नामक फैक्टरी है। इससे हो रहे प्रदूषण के चलते रहवासी महीनों से बंद करवाने कह रहे हैं। यहां 150 परिवार रहते हैं। लोगाें का कहना है कि डीआईसी से लाइसेंस मिला है तो उद्योग को तिफरा इंडस्ट्रियल एरिया में शिफ्ट किया जाए। बिल्डिंग में बैटरी बनाने में इस्तेमाल किए जाने वाले एसिड की गंध से लोग दिन-रात परेशान रहते हैं। कंपनी को लघु उद्योग के नाम पर अस्थाई लाइसेंस 21 मार्च 2006 काे दिया गया था। इसके बाद डीआईसी से 6 जुलाई 2013 को स्थाई लाइसेंस जारी किया। तीन साल पहले फैक्टरी में काम करने वाली शोभा सोनी नामक महिला पर तेजाब गिरने से उसका हाथ जल गया था। आरोप है कि उसके इलाज के लिए संचालक ने मदद नहीं की।
हाथ ठीक होने के बाद उसे दोबारा काम पर भी नहीं रखा। सरपंच जितेंद्र यादव का कहना है कि आबादी के बीच चल रही इस फै