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- एनआईसीयू में शिशुओं के लिए 20 वॉर्मर की जरूरत, इसके बाद भी बढ़ाए केवल दाे हैं
एनआईसीयू में शिशुओं के लिए 20 वॉर्मर की जरूरत, इसके बाद भी बढ़ाए केवल दाे हैं
नसबंदीकांड के बाद सिम्स की नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट में 19 नवजातों की मौतों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग नहीं जाग रहा है। वर्तमान में एनआईसीयू में 27 बच्चे गंभीर स्थिति में भर्ती हैं। पहले यहां 10 वाॅर्मर रखे गए थे। मौतों का आंकड़ा बढ़ने पर सिम्स प्रबंधन ने प्रशासन की फटकार के बाद दो वॉर्मर बढ़ाए, जबकि जरूरत 20 अतिरिक्त वाॅर्मर की है। गौरतलब है कि जिले में सिम्स ही ऐसा सरकारी अस्पताल है, जहां एनआईसीयू है।
जिले के तमाम ब्लॉकों के स्वास्थ्य केंद्रों से बीमार और प्री-मेच्योर शिशुओं को रेफर करने के बाद यहां के एनआईसीयू में उन्हें रखने की जगह नहीं बचती। गांवों से निम्न मध्यम वर्ग के लोग शिशुओं को निजी अस्पतालों के बजाय सिम्स लेकर अाते हैं। नवंबर में नसबंदी कांड के बाद पीड़ित महिलाओं की संख्या बढ़ी तब सिम्स में वेंटिलेटर डायलिसिस मशीनें कम पड़ गई थीं। इसके चलते बड़ी संख्या में महिलाओं को अपोलो निजी अस्पतालों में रेफर करना पड़ा। अब नवजातों के मामले में उसी तरह से संसाधनों और उपकरणों की कमी सामने रही है।
जिला अस्पताल में एनआईसीयू तैयार की जा रही है। अभी यहां आने वाले केस सिम्स या अपोलो अस्पताल रेफर कर िदए जाते हैं।
जिले में आठ सीएचसी, 55 पीएचसी 272 सब-सेंटर हैं। इनमें पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को सिम्स रेफर कर दिया जाता है। यही हाल बीमार शिशुओं के मामले में हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग जननी एवं शिशु सुरक्षा कार्यक्रम चला रहा है। इसके अंतर्गत उन्हें नि:शुल्क जांच उपचार के साथ डिलिवरी के समय अस्पताल लाने-ले जाने की नि:शुल्क व्यवस्था की गई है।
सीएचसी, पीएचसी से कर दिए जाते हैं रेफर
स्वास्थ्य केंद्रों के लिए सुविधाएं जुटा रहे हैं
सरकारीअस्पतालों में जच्चा-बच्चा के उपयुक्त इलाज के लिए व्यवस्थाएं जुटाई जा रही हैं। नए साल में यहां पर्याप्त व्यवस्थाएं नजर आएंगी। कोशिश होगी कि किसी हाल में जच्चा-बच्चा को जान का खतरा हो।\\\'\\\' डॉ.एसपी सक्सेना, सीएमएचओ,बिलासपुर
हाइपोथर्मिया से बचाता है वाॅर्मर
जन्मलेने के बाद, खासकर प्री-मैच्योर नवजातों को पर्याप्त गर्मी की जरूरत होती है। जो बच्चा ज्यादा कमजोर होता है, उसके शरीर का तापमान कम होने से हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ जाता है। उसे निमोनिया या फिर अन्य बीमारी हो सकती है। मौत भी हो सकती है। वाॅर्मर ऐसा उपकरण है, जिसके जरिए श