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‘पहल’ से जुड़े एक लाख, शुरुआत में नहीं था आसान
देशमें अब तक 10 करोड़ गैस उपभोक्ता गैस सब्सिडी योजना यानी पहल से जुड़ चुके हैं। जिले में ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या एक लाख को पार कर चुकी है। नोडल अधिकारी उनकी पूरी टीम इससे उत्साहित है और वे मार्च के अंत तक सभी उपभोक्ताओं के योजना से जुड़ने की उम्मीद कर रहे हैं।
मोदी सरकार ने 15 नवंबर को देश के 49 जिलों में डायरेक्ट बेनीफिट टू ट्रांसफर एलपीजी (डीबीटीएल) योजना की शुरुआत की। देशभर में 1 जनवरी से योजना शुरू करने के लिए सभी जिलों की तरह बिलासपुर जिले की ऑयल कंपनियों के अधिकारी गैस एजेंसियों को पत्र भेजा गया। ढाई महीने पहले यानी नवंबर में सबसे पहले जिले के गैस उपभोक्ताओं को सब्सिडी की रकम सीधे उनके बैंक खाते में जमा होने की जानकारी देते हुए डीबीटीएल योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। शुरुआत में उपभोक्ता को इस योजना के लिए तैयार करना आसान नहीं था। उपभोक्ताओं को यह समझ में ही नहीं रहा था, उन्हें लग रहा था कि ऐसा करने से तो उनका बैंक नंबर सार्वजनिक हो जाएगा और भविष्य में उन्हें असुविधा होगी। वे योजना के लिए तैयार नहीं हो रहे थे तब गैस एजेंसियों ने माउथ पब्लिसिटी का तरीका अपनाया। जो भी उपभोक्ता उनकी एजेंसी में गया उसे भरोसे में लेकर इस योजना से होने वाले फायदे के बारे में बताया गया। एजेंसियों ने अपनी खर्च पर फॉर्म तक उपभोक्ताओं को मुहैया करवाए। गैस एजेंसियों के प्रयास से धीरे-धीरे उपभोक्ताओं की सोच बदलने लगी और वे योजना से जुड़ने लगे। एजेंसियों के अलावा कलेक्टोरेट, रेलवे क्षेत्र और कुछ अन्य इलाकों में योजना को सरलता से समझाने के लिए बैनर-पोस्टर लगाए गए। उपभोक्ताओं को बैंक के चक्कर लगाने पड़े इसलिए बैंकों के फॉर्म भी एजेंसियों में लेने की शुरुआत हो चुकी है, जिसका फायदा उपभोक्ताओं को मिलने लगा है। सभी एजेंसियों को मिलाकर अब तक एक लाख से अधिक उपभोक्ता पहल योजना से जुड़ चुके हैं जबकि अधिकांश के खातों में गैस सब्सिडी की रकम भी जमा होने लगी है। हालांकि इस दरम्यान गैस एजेंसियों की कार्यशैली रवैए को लेकर अधिकारियों को शिकायतें भी मिलीं। अब अधिकारी मार्च अंत तक बाकी सभी उपभोक्ताओं को योजना से जोड़ने की बात कह रहे हैं।
शुरुआत में उपभोक्ता तैयार नहीं थे
^जिलेमें 70 प्रतिशत से ज्यादा उपभोक्ता योजना से जुड़ चुके हैं। मार्च के अंत तक सभी उपभोक्ता योजना से जुड़ जाएंगे और सभी को इसका लाभ मिलेगा। शुरुआत में यह आसान नहीं था। इसके लिए कोई तैयार नहीं हो रहा था। एजेंसियों के प्रयास, बैंक, प्रशासन मीडिया की मदद से काम आसान हुआ। -विक्रम मोदी, नोडल अधिकारी, डीबीटीएल
{ उपभोक्ताओं के लिए दो की जगह एक फॉर्म लाया गया।
{ लोगों की सुविधा के लिए mylpg.in वेबसाइट लांच की गई।
{ मैसेज के माध्यम से भी आधार नंबर रजिस्टर्ड करने की शुरुआत की गई।
{ नौकरी पेशा उपभोक्ताओं को जोड़ने के लिए रविवार को एजेंसियां खुली रखी गई।