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नहीं सहेज पा रहे धान तो सरकार ले आई ‘धान के बदले दलहन-तिलहन’ योजना
नहीं मिल रहे कवर्ड गोदाम, मिलर्स से कह रहे ज्यादा धान ले जाने
साल-दर-सालअमानक होते धान और इससे हो रहे करोड़ों के घाटे से निजात पाने के लिए राज्य सरकार ने धान को कवर्ड गोदामों में सहेजने का निर्णय तो लिया, लेकिन अभी इसका सिस्टम नहीं बन पाया है। अधिकारी कवर्ड गोदाम नहीं खोज पाए हैं। ऐसे में मिलरों पर ही दबाव बना रहे हैं कि वे ज्यादा से ज्यादा धान समितियों से उठाव कर लें ताकि धान संग्रहण केंद्र जाकर अमानक होने से बच जाए।
फूड विभाग के नए संचालक डॉ. कमलप्रीत सिंह ने 3 फरवरी को कलेक्टरों को पत्र लिखकर खरीदी केंद्रों में रखे धान के सुरक्षित भंडारण के लिए जरूरी क्षमता के कवर्ड गोदाम मंडी प्रांगण तय करने के आदेश जारी किए। हालांकि, पत्र में प्राइवेट सेक्टर या निजी गोदामों में धान को सहेजने का जिक्र नहीं किया, लेकिन डिपार्टमेंट में इसे लेकर चर्चा रही। कहा गया कि अगर योजना सफल रही तो खरीदी केंद्रों में धान खराब नहीं होगा और सरकार करोड़ों का घाटा बचा लेगी। इसके बाद कलेक्टरों ने मार्कफेड को कवर्ड गोदाम तलाशने का जिम्मा सौंपा। शेषपेज|17
जिलेके अधिकारी अब तक कवर्ड गोदामों की तलाश नहीं कर सके। पत्र में यह भी आदेश था कि राइस मिलर्स धान ले जा सकते हैं, लेकिन मार्कफेड के खुले गोदामों को धान दिया जाए। गोदाम नहीं मिला तो अधिकारी मिलरों पर अधिक धान उठाव करने के लिए दबाव बना रहे हैं ताकि वे अपने मिल में धान ले जाएं और पीडीएस के लिए एफसीआई और नागरिक आपूर्ति निगम के गोदामों में चावल जमा करते रहे। मिलरों के लिए भी इसमें संकट है। उनका कहना है कि उनके पास चावल रखने की जगह नहीं है, ऐसे में वे ज्यादा धान का उठाव नहीं कर सकते। हालांकि कई मिलरों के पास पर्याप्त जगह है और वे जानबूझकर मार्कफेड को धोखे में रखकर बहानेबाजी कर रहे हैं। मार्कफेड के अधिकारी इस बहानेबाजी को बखूबी समझ रहे हैं और उन पर धान का उठाव करने के लिए दबाव बनाए हुए हैं। मार्कफेड के डीएमओ एपी त्रिपाठी उन सभी सोसाइटियों का दौरा कर चुके हैं, जहां ज्यादा धान रखा हुआ है। वे अपनी उपस्थिति में मिलरों से धान उठाव करवा रहे हैं। शनिवार को वे पेंड्रा के कोडगार सोसायटी में थे और धान का उठाव करवा रहे थे। इधर राज्य शासन ने 15 फरवरी तक सोसाइटियों में रखे धान का उठाव करने का निर्देश दिया है लेकिन इस महीने के अंत तक यदि उठाव पूरा कर लिया गया तब भी यह मार्कफेड के लिए बड़ी बात होगी।
समितियों में जमा है 25
लाख क्विंटल धान
बिलासपुरमुंगेली जिले की सोसाइटियों में इस बार करीब 58 लाख क्विंटल धान खरीदा गया है। इसमें से लगभग 25 लाख क्विंटल धान अभी भी खुले में रखा है।
खरीदी केंद्र में सुरक्षा सहेजने का इंतजाम होने से कांटे घेरकर रखा धान।
नहीं मिल रहे गोदाम, मिलरों से ले रहे सहयोग
^तलाशकरने की पूरी कोशिश की गई है, लेकिन अब तक कवर्ड गोदाम नहीं मिला है। अब धान का उठाव तो सोसाइटियों से करवाना है इसलिए राइस मिलरों को जल्द से जल्द धान का उठाव करने कहा जा रहा है। इससे उन्हें थोड़ी मुश्किल हो रही है लेकिन उनसे धान को अमानक होने से बचाने के लिए सहयोग मांगा जा रहा है। इस बार धान अमानक नहीं होने दिया जाएगा।\\\'\\\' एपीत्रिपाठी, डीएमओ मार्कफेड
साल-दर-साल बढ़ रहा है नुकसान
2007-08
302 करोड़
2008-09
509 करोड़
2009-10
407 करोड़
2010-11
572 करोड़
2011-12
601 करोड़
2012-13
744 करोड़