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ये कैसा आदेश, 23 दिन बाद भी जांच नहीं

6 वर्ष पहले
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जिलामलेरिया अधिकारी ने विभाग के 10 कर्मचारियों का दिसंबर का वेतन रोक दिया था। छत्तीसगढ़ प्रदेश कर्मचारी संघ के हस्तक्षेप के बाद आठ कर्मचारियों का वेतन तो दिया, लेकिन दो कर्मचारियों का वेतन अभी भी रोका गया है। इस संबंध में सीएमएचओ ने विभाग के खिलाफ जांच आदेश जारी करते हुए जांच का जिम्मा जिला टीकाकरण अधिकारी को सौंपा था। इसके लिए उन्हें सात दिन का समय दिया गया था, पर 20 दिन बाद भी इसकी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।

मलेरिया विभाग गड़बड़ियों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहा है। ऐसी ही एक गड़बड़ी विभाग में कार्यरत 10 कर्मचारियों का वेतन रोकने के लिए की गई है। गौरतलब है विभाग में लगभग 90 कर्मचारी कार्यरत हैं। दिसंबर में इनमें से 10 कर्मचारियों का वेतन बिना कारण रोक दिया गया था। इस पर छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने विरोध जताते हुए कलेक्टर, संभागायुक्त सीएमएचओ डाॅ. एसपी सक्सेना से शिकायत कर कर्मचारियों को जल्द वेतन देने वेतन रोकने के कारणों की जांच कराने मांग की थी। जिस पर उन्हाेंने जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एसके लाल को कारण बताने और रोका गया वेतन जल्द देने के निर्देश दिए थे। निर्देश मिलने पर लाल ने विभाग ने आठ कर्मचारियों का वेतन तो स्वीकृत कर दिया। दो कर्मचारियों का वेतन अब भी रोककर रखा गया है। इधर सीएमएचओ ने जिला मलेरिया अधिकारी द्वारा कारण बताओ नोटिस का जवाब मिलने पर 14 जनवरी को जिला टीकाकरण अधिकारी डाॅ. एमए जीवानी को इसकी जांच का जिम्मा सौंपा। उन्हें सात दिन में जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए थे। निर्देश दिए 23 दिन बीत गए, अभी तक जांच की प्रक्रिया ही शुरू नहीं हुई है।

गैर कानूनी ढंग से कर दिया गया था अटैचमेंट

शासनने अटैचमेंट पर रोक लगा रखी है। अवमानना पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। इसके बावजूद जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. लाल ने पूर्व सीएमएचओ डाॅ. भांगे की सहमति से 2014 में विभाग के लैब टेक्नीशियन एनएल सर्वे को जिला अस्पताल ड्राइवर रज्जू राम महिलांगे को स्वास्थ्य केंद्र बिल्हा अटैच कर दिया गया। सीएमएचओ की स्थापना शाखा से आदेश मिले बिना डाॅ. लाल ने दोनों कर्मचारियों को ज्वॉइनिंग का आदेश जारी भी कर दिया।