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टेमीफ्लू टेबलेट बांटने का दावा, जागरूकता के लिए कुछ नहीं

6 वर्ष पहले
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प्रदेशवासियोंको स्वाॅइन फ्लू का डर सता रहा है, लेकिन स्वास्थ्य महकमे को इसकी चिंता ही नहीं है। बीमारी से निपटने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई गई है। सीएमएचओ ने हैदराबाद से 600 टेमीफ्लू टेबलेट के आॅर्डर जरूर दिए हैं, मगर ये तभी आएंगे जब यहां पीड़ितों की पहचान हो जाएगी।

दूसरे राज्यों में स्वाॅइन फ्लू के बढ़ते कहर को देखते हुए प्रदेशवासी डरे-सहमे हैं, मगर स्वास्थ्य विभाग है कि अभी भी पूरी तरह सचेत नहीं हुआ है। जिला अस्पताल सिम्स में अपने-अपने स्तर पर तैयारी की गई है। टेमीफ्लू के दो-दो सौ टेबलेट भी रखे गए हैं, लेकिन जागरूकता के लिहाज से स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक कोई कार्ययोजना तैयार नहीं की है। सीएमएचओ एसपी सक्सेना के अनुसार उन्होंने संभागभर में अलर्ट जारी किया है। जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी के डाॅक्टरों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने के लिए कहा है, लेकिन हकीकत तो यह है कि इसके लिए तो अस्पताल तैयार है और ही लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

नियमानुसार अस्पताल सार्वजनिक स्थलों में स्वाइन फ्लू की जानकारी देने और इससे बचाव से संबंधित बैनर-पोस्टर लगने चाहिए। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को विशेष कर ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जाकर पता लगाना चाहिए कि कोई लगातार सर्दी-खांसी बुखार से पीड़ित तो नहीं है। यदि है तो उन्हें अस्पताल पहुंचा कर इलाज कराना चाहिए। पर ये सब कुछ नहीं हो रहा है।

हर बार नए स्वरूप में आता है स्वाइन फ्लू

एमडीडाॅ. सीएस उइके के अनुसार स्वाॅइन फ्लू हर बार नए स्वरूप में सामने आता है। बीमारी का सिंपटम्स पता कर दूसरे कॉम्बिनेशन की दवाएं बनानी पड़ती हैं। पहले स्वाॅइन फ्लू के स्वरूप के अनुसार वैज्ञानिकों ने इसका नाम एच-1, एन-1 रखा था। अब यह एच-5, एन-1 हो गया है। पुरानी कॉम्बिनेशन की टेमी फ्लू टेबलेट या एंटी वायरल स्वाइन फ्लू इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। अमेरिका आदि देशों में एच-5, एन-5 स्वाइन फ्लू हैं, वहां दवाओं का कॉम्बिनेशन भी अलग है। सिम्स के अधीक्षक माइक्रोबाॅयलोजी प्रभारी डाॅ. रमणेश मूर्ति के अनुसार स्वाॅइन फ्लू क्लाइमेट के अनुसार स्वरूप लक्षण बदलता है।

सीधी बात

-डॉ. एसपी सक्सेना, सीएमएचओसंयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं बिलासपुर

हम पूरी तरह सतर्क हैं, हर स्तर पर होगी मॉनिटरिंग

पड़ोसी राज्यों में स्वाॅइन फ्लू का कहर बढ़ता जा रहा है। संभाग में अभी तक इसके लिए कोई कार्ययोजना तैयार नहीं की गई है। क्या घातक परिणाम का इंतजार किया जा रहा है?

{ऐसानहीं है, हम पूरी तरह सतर्क हैं। संभागभर में अलर्ट जारी किया जा चुका है।

सिर्फअलर्ट कर देने से क्या बीमारी से लड़ा जा सकेगा। लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक करने के क्या प्रयास किए जा रहे हैं?

{सीएचसी,पीएचसी के डाॅक्टरों वहां ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय स्तर पर माॅनिटरिंग करें। कोई पांच से सात दिन लगातार बीमार रहता है तो उसे जिला अस्पताल रेफर करवाएं।

लोगोंको जागरूक करने अस्पतालों सार्वजनिक स्थानों में बैनर-पोस्टर भी लगने चाहिए पर तो यह किया जा रहा और स्वास्थ्य कार्यकर्ता लोगों तक पहुंच रहे।

{अभीइस क्षेत्र में ऐसी स्थिति नहीं आई है।