पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • ठोस साक्ष्य पर क्षमा दे सकते हैं राज्यपाल

ठोस साक्ष्य पर क्षमा दे सकते हैं राज्यपाल

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
हाईकोर्टने कहा है कि ठोस तथ्य होने पर राज्यपाल संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए दोषी को क्षमा देने के साथ ही मुक्त करने का आदेश दे सकते हैं। पिता के हत्यारों को कोर्ट से उम्रकैद की सजा मिलने और सुप्रीम कोर्ट से भी अपील खारिज होने के बाद राज्यपाल ने क्षमा याचना मंजूर करते हुए मुक्त करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ याचिका लगाई गई थी। बरन, करन, भीखम, अर्जुन, ननकू, परेथन समेत 19 लोगों को 11 जुलाई 1975 की सुबह करीब 8.30 बजे हनुआ नाम के एक शख्स की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 149 और 302 के तहत जुर्म दर्ज किया गया था। ट्राॅयल कोर्ट ने अर्जुन, भीखम, शेष|पेज9





ननकूऔर परेथन को छोड़कर अन्य को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई। हाईकोर्ट ने सजा के आदेश को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई। सुप्रीम कोर्ट ने 5 अक्टूबर 1990 को दिए गए आदेश से करन, बरन समेत चार को छोड़कर सभी को बरी कर दिया। चार में से दो ने राज्यपाल के समक्ष क्षमा देने के लिए अर्जी पेश की थी। इसे मंजूर करते हुए राज्यपाल ने दोनों को मुक्त करने को आदेश दिया था। मृतक के बेटे भरत ने इसे गलत ठहराते हुए 2004 में हाईकोर्ट में याचिका लगाई। इसमें कहा गया कि सीआरपीसी की धारा 433 के तहत उम्रकैद की सजा होने पर न्यूनतम 14 वर्ष की सजा पूरी किए बगैर जेल से रिहा नहीं किया जा सकता। मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस प्रशांत मिश्रा की बेंच ने याचिका खारिज करते हुए कहा है कि ठोस दस्तावेज होने पर राज्यपाल द्वारा संविधान की धारा 161 के तहत मिले अधिकारों का उपयोग करते हुए दोषी को क्षमा और मुक्त करने का आदेश अवैध नहीं है।