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डायरिया फैला तब पानी जांचने के लिए लैब की याद आई

6 वर्ष पहले
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बिलासपुर। तालापारा में डायरिया फैलने और नगर निगम द्वारा सप्लाई किए जाने वाले पानी में बैक्टीरिया के प्रभाव की जानकारी मिलने के बाद निगम को वाटर टेस्टिंग लैब की याद आई। निगम के पंप हाउस परिसर में जल आवर्धन योजना के अंतर्गत पीएचई ने छह महीने पहले लैब भवन बनवाया था, लेकिन इसके लिए इक्विपमेंट की खरीदी अब तक नहीं की जा सकी है। इनकी खरीदी में महीनेभर का समय लगेगा। 2010 में उपकरण खरीदने के लिए पांच लाख रुपए मंजूर किए गए थे, लेकिन अब इनकी कीमत 20 लाख रुपए पहुंच गई है।

शहर में डायरिया का प्रकाेप शुरू होने और इसके पीछे प्रदूषित पेयजल की वजह पता चलने के बाद निगम कमिश्नर रानू साहू ने पीएचई के कार्यपालन अभियंता एसके पांडे को महीनेभर के अंदर लैब के लिए जरूरी इक्विपमेंट की खरीदी के लिए कहा है। पांडे के मुताबिक वर्ष 2010 में पानी की जांच के लिए जल आवर्धन योजना के अंतर्गत लैब भवन के निर्माण के लिए 15 लाख और इक्विपमेंट की खरीदी के लिए 5 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे। चार साल बीतने के बाद अब इक्विपमेंट की खरीदी पर करीब 20 लाख रुपए खर्च आएगा।
इसके लिए कमिश्नर को इस्टीमेट दिया गया है। इधर, खरीदी के लिए टेंडर कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। निगम की अपनी टेस्टिंग लैब नहीं होने के कारण शहरभर में सप्लाई होने वाले पेयजल के सैंपल की जांच पीएचई के लैब से करवाई जाती है। जल आवर्धन योजना के अंतर्गत इस कमी को ध्यान में रखकर लैब का प्रस्ताव जोड़ा गया, लेकिन पूरी योजना की तरह लैब को भी अब तक निगम को हैंडओवर नहीं किया जा सका है।

पंप हाउस कैंपस में पिछले छह महीने से तैयार पड़ी बिल्डिंग में अब पानी टेस्टिंग लैब शुरू करने की तैयारी की जा रही है। नगर निगम के अंतर्गत स्लम एरिया में पाइप लाइन में लीकेज का सर्वे कर इन्हें दुरुस्त करवाने के लिए कमिश्नर ने तीन अधिकारियों की ड्यूटी लगाई है। इनमें अधीक्षण अभियंता भागीरथ वर्मा को तालापारा, बंधवापारा, चुचुहियापारा, कार्यपालन अभियंता वीके खेत्रपाल को चिंगराजपारा, मेलापारा और कार्यपालन अभियंता यूजिन तिर्की को टिकरापारा क्षेत्र में पाइप लाइन में लीकेज का सर्वे रिपेयरिंग करवाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही तीनों अफसरों को हर रोज प्रोग्रेस रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

इक्विपमेंट की खरीदी के लिए अब शासन से स्वीकृति लेंगे

‘आगलगने पर, कुआं खोदने’ वाली कहावत नगर निगम की कार्यशैली पर पूरी तरह चरितार्थ होती है। निगम को लैब भवन बनने के बावजूद इसे शुरू करवाने के लिए टेस्टिंग इक्विपमेंट की खरीदी की सुध तब आई, जब तालापारा में सप्लाई होने वाले पानी में बैक्टीरिया पाया गया। नल-जल विभाग के अधीक्षण अभियंता भगीरथ वर्मा ने सफाई दी कि तालापारा में जिस घर से पानी का सैंपल लिया गया था, वह मटके में रखा था, इसलिए बैक्टीरिया अन्य वजह से पाया गया होगा। वहीं के सार्वजनिक नल के पानी की जांच में ओके रिपोर्ट मिली। इधर, निगम कमिश्नर रानू साहू ने बताया कि लैब शुरू करवाने जरूरी उपकरणों की खरीदी के लिए राशि की स्वीकृति शासन से ली जाएगी।