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उनकी सियासत से छात्र और प्राध्यापक हो रहे तंग, पढ़ाई का माहौल चौपट

7 वर्ष पहले
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सीएमडी कॉलेज में शनिवार को कुर्सी के लिए फिर दोनों प्राचार्य डॉ. एसएन अग्रवाल और डीके चक्रवर्ती के बीच जोरदार विवाद हुआ। कुर्सी नहीं मिलने से नाराज अग्रवाल को प्रशासन की दहलीज तक जाना पड़ा। लौटे तो प्राचार्य के दफ्तर में दोनों के बीच जुबानी जंग चली। उधर, प्रबंधन और प्राचार्य के बीच रोज-रोज के विवाद से छात्राें की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। प्रोफेसर भले ही चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन वे इस कदर तनाव में हैं कि ढंग से क्लास तक नहीं ले पा रहे हैं। इससे स्टूडेंट्स की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसी बीच छात्रनेताओं को नेतागिरी भुनाने का मौका मिला और तोड़-फोड़ तक होने लगी है। कॉलेज में धीरे-धीरे डीपी विप्र कॉलेज जैसे हालात बनते जा रहे हैं, जहां ऐसी ही नौबत आने पर प्रशासक बैठाया गया था।

सीएमडी कॉलेज में विवाद की शुरुआत छात्रसंघ चुनाव के समय से हो गई थी। चुनाव के दौरान अभाविप और एनएसयूआई समर्थक उम्मीदवारों के लिए कांग्रेस और भाजपा नेता आपस में भिड़े थे। असंतुष्टों की ओर से नए नाम से पैनल भी खड़ा कर दिया गया। अपना-अपना वजन और रुतबा दिखाने की होड़ लगी रही है। अभी यह विवाद थमा भी नहीं है कि प्राचार्य की कुर्सी को लेकर घमासान शुरू हो गया। इसमें प्रबंधन और शासन से नियुक्त डॉ. एसएन अग्रवाल के बीच विवाद चल रहा है। दूसरी ओर इस दौरान छात्रनेता भी तोड़-फोड़ करने से बाज नहीं रहे हैं। हद तो यह है कि कॉलेज छात्रसंघ के पदाधिकारी भी उनका ही साथ दे रहे हैं। बीता सप्ताह कॉलेज के लिए खासा हंगामेदार रहा, जब कॉलेज के हालात रोज बदलते रहे। अंचल का सबसे बड़ा काॅलेज होने से यहां की गतिविधियों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

दोनोंओर से सेंके रहे रोटी

सीएमडीकॉलेज के हालात डीपी विप्र कॉलेज की तरह बन रहे हैं। विवाद को लंबा खींचने, घटनाक्रम को पेचीदा बनाने के लिए सीधे तौर पर परदे के पीछे के लोग जिम्मेदार हैं। शेषपेज|15

वेनहीं चाहते कि सीएमडी काॅलेज के विवाद का जल्द अंत हो। यही वजह है कि दोनों ओर से खंदक की लड़ाई लड़ी जा रही है।

...और शाम को 35 प्रोफेसरों के वेतन का रास्ता साफ

पांच महीने से प्रोफेसरों को वेतन नहीं मिल पा रहा था। राज्य शासन के पास फाइल भेजी गई थी, लेकिन सीनियाॅरिटी पर बात अटकने से फाइल भी लटकी हुई थी। मामला कोर्ट में जाने के बाद शासन ने कॉलेज के ही सीनियर प्रोफेसर डॉ. एसएन अग्रवाल