पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • राशन दुकानों में हो रही चोरियां, बीमा क्यों नहीं करवाता खाद्य विभाग

राशन दुकानों में हो रही चोरियां, बीमा क्यों नहीं करवाता खाद्य विभाग

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
शासकीयउचित मूल्य की दुकानों में संदिग्ध रूप से आए दिन चोरियां हो रही हैं। संदिग्ध इसलिए कि कई क्विंटल राशन की चोरी होती है, जिसे ले जाने के लिए मालवाहक वाहनों की जरूरत होगी और हम्माल भी चाहिए। अगर सचमुच चोरी हो रही है तो यह दुकान संचालक या चौकीदार की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। कार्डधारियों का अनाज दुकानों में सुरक्षित नहीं है तो खाद्य विभाग को इसका बीमा करवाना चाहिए।

जिले में करीब 750 शासकीय उचित मूल्य दुकानों में से अधिकांश का संचालन सहकारी समितियों द्वारा किया जा रहा है। कुछ दुकानें महिला स्व सहायता समूह तो कुछ ग्राम पंचायतें चला रही हैं। दुकान चाहे जो चलाए लेकिन बड़ी संख्या में राशन की हेरा-फेरी गड़बड़ियां आम बात है। अक्सर कार्डधारी चावल गेहूं नहीं दिए जाने, घटिया स्तर का अनाज देने, हर माह अनाज नहीं मिलने, घासलेट और शक्कर को मार्केट में खपाने की शिकायत जिला प्रशासन तक पहुंचती है। राशन की हेरा-फेरी के लिए कई तरीके अपनाए जाते हैं। राशन दुकानों में होने वाली चोरी को भी इनमें से एक तरीका माना जाता है। हालांकि दुकानदार हो या संचालक, दुकान में चोरी को वास्तविक बताते हुए खाद्य विभाग में घटना की शिकायत और थाने में अज्ञात चोर के खिलाफ एफआईआर भी करवाते हैं। अक्सर राशन की चोरी को संदेह की नजर से देखा जाता है। जनता का आरोप है कि दुकानदार खाद्यान्न को मार्केट में बेच देते हैं और चोरी होने की झूठी शिकायत करते हैं। दुकानदार एफआईआर करवाने के बाद पुलिस पर चोरों को नहीं पकड़ने का आरोप लगाते हैं। इस तरह के मामलों में नुकसान कार्डधारियों को होता है, क्योंकि शासन दोबारा खाद्यान्न नहीं देता। यानी कार्डधारियों को उस माह या तो राशन नहीं मिलता या फिर कम मिलता है।

इन दुकानों में हुई चोरियां

बीमा की पहल हुई, लेकिन मुख्यालय ने ध्यान नहीं दिया

लगातारचोरियों से सवाल उठता है कि अगर राशन दुकानों में कार्डधारियों को देने के लिए रखा गया खाद्यान्न सुरक्षित नहीं है तो उसका बीमा क्यों नहीं करवाया जाता। स्थानीय अधिकारियों ने इसके लिए प्रयास भी किया, लेकिन खाद्य संचालनालय ने रुचि नहीं ली। पीडीएस का चावल बाजार में खपने की शिकायत लगातार खाद्य विभाग को मिलती है, लेकिन संबंधित के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। फूड कंट्रोलर ने आज तक जांच करवाना भी जरूरी नहीं समझा। अगर व्यापार विहार में ही ईमानदारी से