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बिगड़े मौसम ने बढ़ाए मरीज... अस्पतालों में इलाज-दवा के लिए लगानी पड़ रही कतार
मौसमके बार-बार बदलते रुख ने आम जनजीवन को बेहाल कर रखा है। सैकड़ों की तादाद में शहर में लोग बीमार पड़ रहे हैं। वायरल, टाइफाइड, मलेरिया और पीलिया जैसी बीमारियां शहर में पैर पसार चुकी हैं। स्वास्थ्य विभाग के जागरूकता कार्यक्रम फेल हो गए हैं। हालात ऐसे हैं कि गांवों से मरीजों की भीड़ शहर के सरकारी और निजी अस्पतालों में पहुंच रही है। जिला अस्पताल, सिम्स में दवाइयों के लिए कतार लगाने की नौबत है। डाॅक्टरों के केबिन में खड़ा होने की भी जगह नहीं है।
जिलेभर में मौसमी बीमारियों का प्रकोप चल रहा है। अलग-अलग इलाकों से सर्दी-बुखार डायरिया के मरीज जिला अस्पताल सिम्स पहुंच रहे हैं। दर्जनों मरीज को प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं। कभी बारिश-बूंदाबांदी तो कभी धूप, इससे मौसम में उमस और गर्मी हो रही है। यह मौसम सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। पानी में खराबी और खान-पान में जरा सी लापरवाही सीधे बीमार कर रही है। इन दिनों अस्पताल में सबसे ज्यादा मरीज वायरल के रहे हैं। वायरल तीन, पांच या सात दिनों तक रहता है। इसमें सिर में तेज दर्द, आंखों में जलन, शरीर और जोड़ों में तेज दर्द महसूस होता है। मरीज दिनभर बिस्तर पर ही पड़ा रहता है। जिला अस्पताल, सिम्स के साथ-साथ शहर के अलग-अलग क्षेत्रों के सिटी डिस्पेंसरी में ऐसे मरीजों की संख्या अधिक है। शेषपेज|15
सातदिन में अगर बुखार नहीं उतरा तो टाइफाइड या मलेरिया की जांच करवानी पड़ रही है। जिला अस्पताल में डाॅक्टरों के केबिन के सामने मरीजों की लंबी-लंबी लाइन रोजाना देखी जा सकती है। डाॅक्टर से पर्ची लिखवाने के बाद मरीज या उनके परिजनों को घंटों कतार में खड़े रहकर दवा लेनी पड़ रही है। इन मरीजों में गरीब तबके के लोग ज्यादा हैं। आम दिनाें में ओपीडी दोपहर 1 बजे बंद हो जाती है, लेकिन इन दिनों यहां मरीजों की जांच दो-ढाई बजे तक हो रही है। शाम को भी 5 बजे से पहले ही आेपीडी के सामने मरीजों की कतार लग जा रही है। मरीज कतार में खड़े नहीं हो पाते, इसलिए परिजन खड़े रहते हैं। कई मरीज हॉल के चेयर में या फिर जमीन पर ही चादर बिछाकर लेटे दिखाई पड़ते हैं।
सिम्सऔर निजी अस्पतालों में भीड़
सिम्सकी ओपीडी का भी हाल यही है। वहां पर भी सुबह डाक्टरों के आने से पहले ही मरीजों की कतार लग जाती है। यहां पर भी सभी तरह के मौसमी बीमारी से पीड़ित मरीज ही पहुंच रहे हैं। वहां भी ह