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बाघों की मौत: क्या कार्रवाई की?

7 वर्ष पहले
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हाईकोर्टने राज्य शासन से पूछा है कि प्रदेश में बाघों की मौत के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई की गई? पिछले साल तीन बाघों की मौत के बाद हाईकोर्ट में बाघों की सुरक्षा को लेकर जनहित याचिका लगाई गई थी। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य शासन, एनटीसीए समेत अन्य को नोटिस देकर जवाब मांगा था।

रायपुर निवासी पर्यावरणविद् नितिन सिंघवी ने 2012 में हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई थी। इसमें कहा गया था कि प्रदेश में बाघ असुरक्षित हैं। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) से हर साल करीब आठ करोड़ रुपए मिलने के बाद राज्य सरकार बाघों को सुरक्षित कर पाने में नाकाम रही है। इसके चलते राजनांदगांव, कवर्धा और भोरमदेव में तीन बाघों को मार डाला गया। इसी तरह छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र की सीमा पर एक बाघ को करंट से मार दिया गया। याचिका में कहा गया था कि टाइगर रिजर्व में अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ ही विशेषज्ञों की कमी है। इसे लेकर वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट का भी पालन नहीं किया जा रहा है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए), केंद्रीय वन पर्यावरण मंत्रालय, वन सचिव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन संरक्षक से जवाब मांगा था।

प्रदेश में नहीं बनाई गई है कमेटी

एक्ट के तहत बाघों की सुरक्षा के लिए कमेटी बनाई जानी थी। राज्य शासन की ओर से अचानकमार टाइगर रिजर्व में ही कमेटी बनाने की जानकारी दी गई। इसी तरह रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की जानी थी। हाईकोर्ट ने बुधवार तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी।