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बेटे को बचाते मां भी गिरी, दोनों की मौत

7 वर्ष पहले
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ट्रेनके गेट के करीब खेल रहे बेटे को बचाने के फेर में मां और बेटे की मौत हो गई। दोनों चलती ट्रेन से गिर पड़े। रायगढ़ से बिलासपुर रही गोंडवाना एक्सप्रेस में यह हादसा तड़के सवा 5 बजे जांजगीर के करीब हुआ। घटनाक्रम चंद मिनटों में हुआ और परिवार मातम में डूब गया। पति की आंखों के सामने उसकी प|ी और मासूम बेटा काल के गाल में समा गए।

रायगढ़ निवासी सत्यम महंत अपनी प|ी रजनी महंत 24 वर्ष बेटा आयुष 2 वर्ष को लेकर सुबह गोंडवाना एक्सप्रेस से बिलासपुर अपने बीमार पिता को देखने रहा था। सत्यम के पिता की तबीयत खराब है और वे बिलासपुर के अस्पताल में भर्ती हैं। सत्यम और रजनी दरवाजे के पास वाली सीट पर बैठे थे। बेटे आयुष के रोने पर उसकी मां उसे चुप करवाने के लिए दरवाजे के पास गई। वह अपने बच्चे को खुली हवा में ले जाकर बहला रही थी। आयुष चुप हो गया और वहीं पर खेलने लगा। इसी बीच मां का ध्यान उस पर से कुछ पल के लिए हट गया। सुबह 5.15 बजे के लगभग ट्रेन बोड़सरा फाटक के पास पहुंची थी। आयुष खेलते-खेलते दरवाजे तक पहुंच गया। अचानक मां रजनी की नजर उस पर पड़ी तो देखा कि उसका बेटा ट्रेन से गिरने वाला है। रजनी ने बच्चे को गिरते देख उसे बचाने के लिए छलांग लगा दी। सीट पर बैठे सत्यम ने तुरंत ट्रेन की चेन खींची। कुछ दूर जाकर ट्रेन रुकी। उतरकर देखने पर दोनों के सिर, हाथ, पैर में चोट आई थी। दोनों की सांसें चल रही थी। देखते ही देखते बोड़सरा के ग्रामीणों की भीड़ वहां जुट गई। उन्होंने सत्यम की मदद की और तत्काल संजीवनी 108 बुलवाकर मां-बेटे को जिला चिकित्सालय भेजा। रास्ते में ही दोनों ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम कर शव परिजनों को सौपा दिया है।

आंखों के सामने उजड़ गयापरिवार

सत्यमअपने परिवार के साथ अपने बीमार पिता को देखने के लिए बिलासपुर जा रहा था। उसे क्या पता था कि यह ट्रेन का सफर उसका परिवार उजाड़ देगा। उसने आंखों के सामने ही प|ी और दो साल के बेटे को खो दिया। उसका रो-रोकर उसका बुरा हाल था। 15 अगस्त को उसने अपने बेटे आयुष का बर्थ डे धूमधाम से मनाया था। वह रायगढ़ में एक होटल में काम करता है। हादसे के बाद उसने इसकी जानकारी अपने परिजनों को दी। उसकी मां और बहन सहित अन्य परिजन जांजगीर के जिला अस्पताल पहुंचे। नाती को देखकर उसकी मां फफककर रोने लगी। उसकी बहन का भी आयुष को देखकर बुरा हाल था।