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छेड़छाड़ के आरोपों से बरी हुए बैंक मैनेजर

7 वर्ष पहले
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बिलासपुर| बैंकमैनेजर छेड़छाड़ के मामले में बरी कर दिए गए हैं। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने छह माह की सजा और पांच हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ अपील की गई थी। वे बिलासपुर एसबीआई के मेन ब्रांच में पदस्थ थे।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की बिलासपुर स्थित मुख्य शाखा के मैनेजर डीएस विरदी के खिलाफ बैंक में कार्यरत महिलाकर्मी ने छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए 17 सितंबर 2010 को अजाक थाने में मामला दर्ज करवाया था। इसमें कहा गया कि विरदी ने 26 जनवरी 2010 और 8 मार्च 2010 को उससे अपने चेंबर में छेड़छाड़ की थी। महिला की रिपोर्ट पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 254 और एट्रोसिटी एक्ट की धारा 3(1) के तहत मामला दर्ज किया था। मामले में सीआरपीसी की धारा 161 के तहत गवाह का बयान रिकॉर्ड किया गया था। जिला एवं सत्र न्यायालय ने उन्हें छह माह की सजा और पांच हजार रुपए जुर्माने की सजा दी थी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई। इसमें कहा गया कि 26 जनवरी के दिन छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया है, जबकि उस दिन अवकाश होने के कारण चेंबर खोला ही नहीं गया था। इसी तरह घटना के करीब पांच माह बाद रिपोर्ट दर्ज करवाई गई। इमामले की सुनवाई जस्टिस संजय के. अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई। हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज करवाने में देरी और स्वतंत्र गवाह प्रस्तुत नहीं कर पाने की वजह से विरदी की अपील मंजूर करते हुए धारा 354 के तहत दी गई सजा को निरस्त करते हुए उन्हें बरी कर दिया है।