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- जिस मिट्टी में कभी गांजे के पौधे उगाते अब उसी से ईंटें बनाकर जीवन चला रहे
जिस मिट्टी में कभी गांजे के पौधे उगाते अब उसी से ईंटें बनाकर जीवन चला रहे
शहरसे लगे सीपत और बेलतरा ब्लॉक में आस-पास के कई गांव अपराध के गढ़ कहे जाते थे। हत्या, चोरी, डकैती, गांजे और शराब की तस्करी यहां के लोगों के लिए आम बात हुआ करती थी। संबंधित थानों में हर महीने दर्जनों प्रकरण दर्ज होते। नतीजा, पुलिस रिकॉर्ड में इन गांवों के नाम झगड़ालू होने का दर्जा चिपक गया। हालात इतने खराब कि किसी मामले में छानबीन और कार्रवाई करने जाने को पुलिस भी घबराती थी, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। पढ़े-लिखे युवाओं के प्रयास ने लोगों का मन और धंधा दोनों बदला है।
सीपत थाने का गांव मटियारी कुछ साल पहले गांजे के कारोबार के लिए कुख्यात था। वहीं पौंसरा, पीपरा, सेलर, मोहरा, परसौड़ी, परसाही, भाड़ी और मटियारी जैसे गांव देसी शराब, अवैध हथियार, लूट, डकैती, हत्या और झगड़े-फसाद के लिए बदनाम थे। जिले में गांजा तस्करी के लिए चर्चित मटियारी में माहौल इतना खराब था कि आरोपियों को पकड़ने गई पुलिस पार्टी पर अपराधियों ने कई बार हमले किए। जवानों की आंखों में मिर्च पावडर छिड़ककर उनके साथ मार-पीट की गई। शेषपेज|17
संबंधितथानों में हत्या, चोरी, डकैती, नकबजनी जैसे प्रकरण रोजाना दर्ज होते थे। इनमें से कई मामले पुलिस आज तक नहीं सुलझा पाई है। फिर एक दौर ऐसा भी आया जो परिवर्तन का था। दरअसल, पढ़े-लिखे कुछ युवाओं ने अपने गांव की बदनाम पहचान को बदलने का बीड़ा उठाया। धीरे-धीरे हालात बदलने लगे। ग्रामीणों ने मेहनत करना शुरू कर दिया। इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिनके हाथ कभी शराब तो कभी गांजे और हथियारों की सप्लाई में रहे। दैनिक भास्कर टीम को चार ऐसे ही लोग मिले। चोरी के आरोप में जेल जा चुके पौंसरा गांव का कोमल सोनी का परिवार सुबह से ईंटें बनाने में जुटा दिखा। परिवार के ही एक सदस्य ने उन्हें इस काम के लिए प्रेरित किया, मदद की। इसी तरह पीपरा गांव में नदी के किनारे कल्लू सिंह का परिवार सुबह 5 बजे से ईंट बनाने मिट्टी गारता है। सभी सदस्य साचे में ढालकर इसे ईंटों में तब्दील करते हैं। धूप में सुखाकर आग में पकाना और फिर सप्लाई रोजाना का काम है। बकौल सोहन अब ध्यान इधर-उधर नहीं भटकता। पुलिस भी इस क्रांतिकारी परिवर्तन को कुछ ग्रामीण और मेहनतकश लोगाें की सकारात्मक सोच का नतीजा मानती है।
अन्य ग्रामीण भी करते हैं प्रेरित, इसलिए बदला नजारा
क्राइम आॅफ विलेज के रूप में दर्ज है इन गांवों का नाम
सरकंडा थाने के मोपका, चिल्हाटी, नगोई, रतनपुर के बेलतरा, भरवीडीह, सिंघरी, चोरहादेवरी, गढ़वट तो तोरवा थाने के देवरीडीह, लालखदान, महमंद पुलिस के क्राइम आॅफ विलेज नोट बुक में झगड़ालू गांव हैं। इसी तरह मस्तूरी में गतौरा, जयराम नगर, कोसमडीह, कोनी थाना क्षेत्र में बिरकोना, घुटकू, सेमरताल, गतौरी, सीपत थाने में सीपत, पोड़ी, रांक, खैरा, बिटकुला, हिंडाडीह, झलमला, मचखंडा, खैरा-डगनिया, खम्हरिया समेत अन्य कई गांव शामिल हैं।
मोहरा गांव के करन और सेलर गांव के रामफल विश्वकर्मा का परिवार पसीना बहाकर ईंट बनाने में जुटा है। ग्रामीण बताते हैं कि जुआ-सट्टा के कारोबारियों को इन्हीं के परिवार ने बदलने के लिए प्रेरित किया। मोहरा में करन की दो पीढ़ियां ईंटें बनाती रही हैं। दो साल पहले इस क्षेत्र में सिर्फ तीन भट्ठे थे, अब 20 हो चुके हैं। खारून नदी के किनारे 10 किमी तक 90 ईंट भट्ठे बन चुके हैं, जिनसे ये परिवार रोजी-रोटी चला रहे हैं।
गांजे का कारोबार छोड़ स्वरोजगार किया
मुन्ना 20 गांवों में कर रहा है सप्लाई
पंचायत और पुलिस ने समझाया कल्लू काे
कुछ सामाजिक कार्यकर्ता और सरपंच की मेहनत का नतीजा है कि सीपत क्षेत्र के मटियारी गांव में दो साल से अपराध कम हो रहे हैं। गांजा तस्करी करने एक मोहल्ले का नाम विशेष रूप से लिया जाता है। यहां रहने वाले शिकारी परिवार मूलत: ओड़िशा और बिहार के हैं, जो सालों से गांजे का कारोबार कर रहे हैं। ट्रेनों के जरिए ये गांजे की तस्करी करते हैं। जयराम नगर स्टेशन इनका अड्डा है। वे आउटर से शिकारी गांव तक गांजा लाने का काम करते हैं। इस माेहल्ले के कुछ परिवारों ने ईंट-भट्ठे के कामकाज को ही रोजगार का जरिया बना लिया है।
पौंसरा से लगे ग्राम परसदा में 42 साल के मुन्ना केंवट के नाम पर जमीन दलाली और दूसरे मामलों के तहत जुर्म दर्ज हुआ। मुन्ना को सुधारने में महिला समूह और पंचायत का बड़ा योगदान है। उसे खारून नदी के किनारे ईंट भट्ठा शुरू करने की नसीहत दी गई। जुर्म की दुनिया छोड़कर अब मुन्ना 20 गांवों में ईंटों की सप्लाई कर रहा है। सीपत थाने की पुलिस भी उसके काम को सराहती है।
सीपत थाने में पीपरा निवासी 32 वर्षीय कल्लू सिंह के नाम पर बलवा और मार-पीट के आधा दर्जन मामले दर्ज हैं। वह जेल में सजा काट चुका है। पंचायत प्रतिनिधियों और पुलिसकर्मियों ने समझाइश दी और उसका ध्यान काम की ओर मोड़ा। कल्लू अब ईंट-भट्ठे में काम करता है। दो सालों में उसके भीतर गजब का बदलाव आया। लड़ाई, झगड़े और फसाद से दूर रहता है। ऐसे में केस दर्ज होने का सवाल ही नहीं उठता।
^इन गांवों में पुलिस पार्टी अपराधियों और जन प्रतिनिधियों के साथ साप्ताहिक बैठक करती है। दो साल से गांवों में क्राइम रोकने और लोगों को सकारात्मक काम करने प्रेरित किया जाता है। इस प्रयास से अगर तस्वीर बदलती दिख रही है तो पुलिस विभाग के लिए अच्छी बात है।\\\'\\\' -जेआर ठाकुर, एएसपी, ग्रामीण
ये तस्वरी बेलतरा ब्लॉक के पौंसरा गांव की है। इस परिवार की तरह कई अन्य के मुखिया या कोई परिजन कभी झगड़े-फसाद में शामिल हुआ करते थे, लेकिन अब वे मेहनत कर जीवनयापन कर रहे हैं। बच्चों को भी शिक्षित कर रहे हैं ताकि वे सही रास्ते पर जाएं। अच्छे काम से गांव का नाम रोशन करें।