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पंचायत चुनाव में टूटे मिथक, बेटियों को सौंपी बागडोर
सुनील शर्मा / अजय गुप्ता बिलासपुर / रतनपुर
जिलाऔर जनपद पंचायत चुनाव में अलग ही तस्वीर उभर कर रही है। नतीजों पर अगर गौर करें तो आधी आबादी को झंडाबरदार बनने, निर्णायक भूमिका निभाने के मौके हासिल हुए हैं। हमारे शहर से 30 किलोमीटर दूर रतनपुर के लोहार की नि:शक्त बेटी को ही लीजिए, लोगों ने उन्हें रतनपुर नगर पालिका अध्यक्ष चुना है। उधर, मेलनाडीह पंचायत में पूरे गांव ने पढ़ी-लिखी युवती को बगैर चुनाव अपना मुखिया चुन लिया। वहीं, मस्तूरी के रिसदा की 23 वर्षीय राजेश्वरी जनपद सदस्य बनी हैं। शेषपेज|17
कुछऐसा ही चौंकाने वाला परिणाम आया मस्तूरी जनपद पंचायत से। यहां महज 23 वर्ष की राजेश्वरी सारथी ने जनपद सदस्य क्रमांक 14 रिसदा से सदस्य का चुनाव जीत लिया।
नगर पंचायत से नगर पालिका परिषद् बने रतनपुर के महामायापारा में रहने वाले आनंदराम सूर्यवंशी को अभी भी यकीन नहीं हो रहा है कि उनकी बेटी पूर्व अध्यक्ष को हराकर नगर पालिका अध्यक्ष बन गई है। यकीन भी आखिर कैसे हो, सूर्यवंशी परिवार पीढ़ियों से लोहारी बढ़ईगीरी कर गुजर-बसर करता रहा है। कभी राजनीति में आने के बारे में सोचने की फुर्सत ही नहीं मिली। लेकिन 27 साल की बेटी आशा ने हिम्मत दिखाई और मिथक तोड़ दिया। बकौल आशा, उसे खुद कई बार भ्रष्ट शासन-प्रशासन की तस्वीर देखने को मिली। इसी से दु:खी होकर राजनीति में आई। आशा के पिता आनंद अपने भाई संतोष और अशोक के साथ लोहारी का काम करते हैं। रतनपुर और उसके आस-पास के गांवों के लोग बैलगाड़ियों के चक्के का पट्टा चढ़वाने उनके पास आते हैं। आनंद के पिता गोविंद और उसके दादा नकछेद भी यही काम करते थे। इधर, रतनपुर इलाके के मेलनाडीह की शारदा गढ़ेवाल की कहानी आशा से कुछ अलग है। शिक्षक पिता भरतलाल की असमय मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी उसके कंधों पर गई। उसने शादी करने के बजाय गांव की सेवा का निर्णय लिया। वह खुद सिलाई-बुनाई का काम करती है और गांव की अन्य महिलाओं को आगे आने के लिए प्रेरित भी। पहली बार स्वतंत्र पंचायत का दर्जा मिला तो ग्रामीणों ने चुनाव के एक महीने पहले अपनी सरकार चुन ली। पंच तो निर्विरोध निर्वाचित हुए ही गांव की पढ़ी-लिखी शारदा गढ़ेवाल को आपसी सहमति से सरपंच निर्वाचित कर लिया। शारदा, उसके लिए पहले यकीन करना मुश्किल था, लेकिन जब ग्रामीणों ने भरोसा जताया है तो वह वहीं करेगी जो गांव के लिए सही होगा।
23 की राजेश्वरी बनी जनपद सदस्य
महज 23 वर्ष की राजेश्वरी सारथी ने मस्तूरी जनपद सदस्य क्रमांक 14 रिसदा से सदस्य का चुनाव जीतकर सभी को चौका दिया है। मस्तूरी सरपंच चमरू सारथी की बेटी राजेश्वरी ने बीए तक की पढ़ाई की है। 25 सदस्यों की टीम में उसे सबसे कम उम्र का सदस्य बताया जा रहा है। राजेश्वरी के राजनीति में आने का निर्णय उनके पिता चमरू ने लिया। रिसदा सीट एससी महिला के लिए आरक्षित हुआ तो चमरू ने राजेश्वरी को मैदान में उतारा। राजेश्वरी कहती है कि मस्तूरी इलाका पिछड़ा हुआ है और महिलाओं की स्थिति चिंताजनक है। पांच सालों में उनकी कोशिश रहेगी कि वह महिलाओं के हित के लिए अधिक से अधिक कार्य करे।
गरीब की बेटी है... उम्मीद नहीं तोड़ेगी
पिताआनंद को आशा से बड़ी उम्मीदें है। खुद के लिए नहीं, रतनपुर के उन सभी लोगों के लिए जो बिजली, पानी, स्वास्थ्य और गंदगी से परेशान है। वह साफ शब्दों में कहते हैं, वह गरीब की बेटी है, गरीबों का दर्द नहीं सुनेगी, उन्हें दूर नहीं करेगी तो फिर उसके अध्यक्ष बनने का क्या मतलब।
लड़कियों के पढ़ने जाने के लिए अलग से बस
^रतनपुरकॉलेज में एमएससी, एमकॉम का कोर्स नहीं है। इसके लिए उन्हें बिलासपुर जाना पड़ता है। उनके लिए अलग से बस का इंतजाम कर रहे हैं। अलग बस में जाने से उन्हें छेड़छाड़ या अन्य परेशानियों से मुक्ति मिल जाएगी।\\\'\\\' -आशासूर्यवंशी, अध्यक्ष, नपा परिषद्, रतनपुर
भगाने वाले अब करते हैं सलाम
सालभर पहले नि:शक्त कोटे से आशा राशन कार्ड बनवाने नगर पालिका गई तो उसे गरीबी रेखा में नाम नहीं होने की बात कहकर भगा दिया गया। आज वही लोग उन्हें सलाम करते हैं। बकौल आशा, नीतियों से प्रभावित होकर कांग्रेस ज्वाइन किया लेकिन मकसद महिलाओं और पीड़ितों को मदद पहुंचाना है।
बेटी आशा के नपा अध्यक्ष बनने के बाद भी पिता-चाचा पुश्तैनी काम कर खुश हैं।