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पांच निकायों के सफाई कर्मियों के हजारों पद खत्म किए जाएंगे
राज्यसरकार ने नगरीय निकायों में सफाई कर्मचारियों के खाली और स्वीकृत पद समाप्त करने का फैसला लिया है। शासन के आदेश में यह स्पष्ट नहीं है कि इसे नगर निगमों सहित 168 नगर पंचायत, नगर पालिकाओं में भी लागू किया जाएगा या फिर केवल उन निकायों में जहां सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (ठोस अपशिष्ट प्रबंधन) से पीपीपी माॅडल पर सफाई की नई व्यवस्था चल रही है या चलने वाली है। हालांकि विभागीय मंत्री के मुताबिक पद खत्म करने का आदेश सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट वाले निगमों में ही लागू होगा। इस दायरे में रायपुर, दुर्ग, भिलाई के अलावा बिलासपुर और कोरबा निगम आएंगे।
शासन के फैसले से म्युनिस्पैलिटी के जमाने से पारंपरिक रूप से सफाई का काम कर रहे कर्मचारियों का नाता नगरीय निकायों से सीधे तौर पर समाप्त हो जाएगा। शासन के आदेश के मुताबिक जो सफाई कर्मचारी वर्तमान में काम कर रहे हैं, उनके रिटायर होने के बाद पद स्वत: समाप्त हो जाएंगे। इन पर दोबारा नियुक्ति नहीं की जाएगी। जाहिर है कि इसके बाद उनकी जगह पर उनके परिवार या समुदाय के किसी व्यक्ति को नगरीय निकाय में सफाईकर्मी की नौकरी नहीं मिल सकेगी। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय सफाई कर्मचारी के स्वेच्छा से त्यागपत्र देने पर उसके परिजन को वरीयता के आधार पर नौकरी देने का प्रावधान था। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद नई सरकार ने इस व्यवस्था को खत्म कर दिया था। शेषपेज|15
इधर,शासन के फैसले का विरोध शुरू
छत्तीसगढ़ स्वायत्तशासी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुरेश तिवारी ने सफाई कर्मचारियों के स्वीकृत रिक्त पदों को डाइंग कैडर घोषित करने के फैसले का विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा देने पर उतारू है। व्यक्ति या संस्था विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए इस तरह के फैसले लिए जा रहे हैं। तिवारी ने शहर की सफाई व्यवस्था के ठेके का उदाहरण देते हुए बताया कि कलेक्टोरेट से कुशल कर्मचारियों के लिए 5200 रुपए मासिक दर स्वीकृत की गई है, लेकिन नगर निगम सफाई ठेकेदारों को 5700 6200 रुपए का भुगतान कर रहा रहा है। इसी तरह, नगर निगम समस्त कर्मचारी संघ के महामंत्री काशी प्रसाद करोसिया ने भी नगरीय निकायों से पद समाप्त करने के फैसले का विरोध किया।
शासन के आदेश में क्या
राज्य शासन ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अलावा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के म्यु