नागपुर-बिलासपुर के...
नागपुर-बिलासपुर के...
इसमेंसे बोर्ड ने प्राथमिक तौर पर तीन सौ करोड़ रुपए पास कर दिए। रकम मंजूर होने के साथ ही जोन ने सेमी हाईस्पीड कॉरीडोर के लिए बाकी प्रक्रिया शुरू कर दी। डेढ़साल में 130 किमी की गति: हाईस्पीड कॉरिडोर का पहला चरण वर्ष 2016 के मध्य तक पूरा होगा। तब नागपुर-रायपुर-बिलासपुर के मध्य 130 किमी की रफ्तार से ट्रेन चला दी जाएगी। हालांकि राजनांदगांव से रायपुर होकर बिलासपुर तक इस रफ्तार पर ट्रेन पहले ही चला दिए जाने की संभावना है। पहले चरण के बाद चुनिंदा ट्रेनों की स्पीड 160 और इनमें से कुछ की 200 किमी प्रति घंटा की जाएगी। पुल,जंगल-पहाड़ों में नई लाइन: राजनांदगांवसे नागपुर के बीच जंगल-पहाड़ों की वजह से ट्रैक को हाई स्पीड करना बड़ी चुनौती होगी। लगभग 262 किमी के इस हिस्से में 74 पुल तथा जंगलों में मोड़ वाली पटरियां हैं। सर्वाधिक खर्च यहीं होगा। कई जगह पूरी लाइन ही बिछेगी। इसी हिस्से में 584 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसतरह होगा खर्च: सिविल इंजीनियरिंग- 887.63करोड़, इलेक्ट्रिकल-11.56करोड़, सिग्नलएवं ट्रैफिक- 24.35करोड़, मैकेनिकल-40.67करोड़, कुल-964.21करोड़।
किरायाविवाद...
मेंसिविल कोर्ट में होने वाले फैसलों को भी चुनौती दी जा सकेगी। यह एक सब-ज्यूडिशियल संस्था होगी, जिसके पास हाईकोर्ट के बराबर शक्तियां होगी। इस दौरान ट्रिब्यूनल के फैसले को सिर्फ सुप्रीम कोर्ट में ही चैलेंज किया जा सकेगा। बता दें कि प्रदेश में हाल ही में इस कानून को लेकर राज्य सरकार ने अध्यादेश जारी किया था। जिसे अमल पर तेजी से कार्रवाई भी चल रही है। दैनिक भास्कर ने सरकार द्वारा एक्ट में किए जाने वाले इस बदलाव की खबर 23 अगस्त को ही प्रकाशित की थी। इनशहरों की स्टडी कर बनाया कानून : प्रदेशमें रेंट कंट्रोल ट्रिब्यूनल के गठन से पहले राज्य सरकार ने उसके स्वरूप को लेकर दिल्ली और तमिलनाडु के ट्रिब्यूनल की भी स्टडी की। इस दौरान उनके काम-काज के स्वरूप और अधिकारों की भी जानकारी ली गई। देश में रेंट कंट्रोल को लेकर गठित किए गए ट्रिब्यूनलों में सबसे पुराना ट्रिब्यूनल दिल्ली और तमिलनाडु का ही है।
ऐसाहोगा स्वरूप: एकअध्यक्ष होगा, जो जिला जज के समकक्ष होगा, साथ ही इसके तीन सदस्य भी होंगे। जो विधिक, सामाजिक और प्रशासनिक आदि क्षेत्रों से जुड़े होंगे। राज्य शासन ने इसके लिए कार्यालयीन सेटअप को भी मंजूर