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अरपा-भैंसाझार प्रोजेक्ट को केंद्र से एनवायरोमेंट क्लीयरेंस मिला

7 वर्ष पहले
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606करोड़ की लागत वाली प्रदेश की सबसे बड़ी अरपा-भैंसाझार बैराज परियोजना को केंद्र से एनवायरोमेंट का क्लीयरेंस देने का निर्णय शुक्रवार को पर्यावरण मंत्रालय, नई दिल्ली में लिया गया। इसके लिए एनवायरोमेंट अप्रेजल कमेटी (आईएसी) के चेयरमैन कुटवर्ती की अध्यक्षता में बैठक हुई जिसमें केंद्र की सीडब्ल्यूसी, हाइड्रोलॉजी तथा विशेषज्ञ शामिल हुए। सभी पहलुओं पर विचार कर प्रोजेक्ट के लिए मंत्रालय की ओर से हरी झंडी दे दी गई।

बैठक में हसदेव कछार के सीई सेलेस्टीन खाखा, एसई विजय कुमार श्रीवास्तव ने प्रोजेक्ट के विभिन्न पहलुओं के बारे में आईएसी कमेटी को जानकारियां दी। स्टेज-1 के लिए क्लीयरेंस पहले ही मिल चुका है। एसई श्रीवास्तव ने उम्मीद जताई कि फाॅरेस्ट के अंतिम क्लीयरेंस की प्रक्रिया संभवत: मार्च में पूरी हो जाएगी। पर्यावरण मंत्रालय में प्रोजेक्ट के प्रस्ताव पर विचार के लिए 13 फरवरी को कोटा में जनसुनवाई के माध्यम से आम लोगों की सहमति ली गई थी।

योजना एक नजर में

{अरपाभैंसाझार बराज परियोजना के अंतर्गत 3 विधानसभा क्षेत्र कोटा, तखतपुर एवं बिल्हा के 92 गांवों के 96930 किसानों की 62500 एकड़ भूमि की सिंचाई होगी।

{योजना का शीर्ष कार्य स्थल यहां से 44 किलोमीटर दूर अरपा के तटवर्ती भैंसाझार (कोटा) गांव है।

{ प्रोजेक्ट के अंतर्गत दो गांवों की 56 हेक्टेयर निजी भूमि और केनाल और हैडवर्क को मिलाकर 550 हेक्टेयर निजी भूमि अधिग्रहित की जा रही है। इसके लिए 70 करोड़ रुपए बतौर मुआवजा प्रभावितों को दिया जाएगा।

{ प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए शासन ने बजट में राशि का प्रावधान करते हुए इसे 3 वर्षों में पूरा कराने का लक्ष्य रखा है।

कोटा ब्लॉक के भैंसाझार के पास सिंचाई परियोजना का काम शुरू हो गया है। नहर लाइनिंग की जा रही है।

परियोजना का शिलान्यास और निर्माण कार्यों का शुभारंभ 16 सितंबर 2013 को पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह की उपस्थिति में आयोजित समारोह में किया जा चुका है। अरपा भैंसाझार सिंचाई परियोजना अंग्रेजों के शासनकाल में 1907 में बनाई गई थी, लेकिन यह मूर्त रूप नहीं ले सकी। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय संविद शासनकाल के तत्कालीन सिंचाई मंत्री मनहरणलाल पांडे ने फिर से योजना के कार्य को आगे बढ़ाया, लेकिन भारी भरकम योजना को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण की स्वीकृति नहीं मिल सकी और इसके बाद छत्तीसगढ़ शासन ने योजना के आकार, प्रकार में परिवर्तन कर इसकी खामियों को दूर कराया। परियोजना को एनवायरोमेंट क्लीयरेंस मिलने के बाद जैसा कि स्पष्ट है कि अब फारेस्ट के अंतिम क्लीयरेंस का भी मार्ग प्रशस्त हो चुका। इसके साथ ही अब परियोजना के हैडवर्क यानी कि स्ट्रक्चर का मुख्य कार्य शुरू करने के लिए मार्च से अधिक देरी नहीं होगी।

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