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सोशल मीडिया का नशा खुद पर हावी होने दें: सीजे

7 वर्ष पहले
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फेसबुक, गूगल प्लस और टि्वटर विचारों को अभिव्यक्त करने के बेहतर विकल्प हैं। इसके जरिए दोस्तों और फॉलोवर को आसानी से नई सूचनाएं दी जा सकती हैं। सोशल मीडिया के नशे से बचने की जरूरत है। अपनी गतिविधियां, फोटो को अपलोड करने से बचें। कानून से जुड़ी गतिविधियों को लेकर खास ऐहतियात की जरूरत है।

चीफ जस्टिस यतींद्र सिंह ने कानूनी पेशे में सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग विषय पर आयोजित व्याख्यान में यह बातें कहीं। इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट की छत्तीसगढ़ इकाई द्वारा शनिवार को हाईकोर्ट के ऑडिटोरियम में हुए कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि ब्लॉग और पॉड कॉस्ट विचारों को अभिव्यक्त करने के बेहतर जरिए हो सकते हैं। इंटरनेट कनेक्शन होने पर इसके लिए अलग से खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती। ब्लॉग में अपने विचारों को विस्तार से लिखा जा सकता है, वहीं पॉड कॉस्ट में इसे आवाज के साथ प्रसारित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि ब्लॉगर और वर्डप्रेस डॉट काम में आसानी से हिंदी में भी बात कही जा सकती है। चीफ जस्टिस ने कहा कि कानूनी पेशे से जुड़े लोगों को सावधानी के साथ सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करना चाहिए, क्योंकि कानून बनाने, सुरक्षा और लागू करवाने की जिम्मेदारी हम पर होती है। उन्होंने ओपन सोर्स साफ्टवेयर के उपयोग को बढ़ावा देने की जरूरत बताते हुए कहा कि इसमें कॉपीराइट, रॉयल्टी की समस्या नहीं होती। उन्होंने कुछ ओपन सोर्स साॅफ्टवेयर की जानकारी भी दी। कार्यक्रम के शुरुआत में जस्टिस प्रशांत मिश्रा ने व्याख्यान की रूपरेखा की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रफुल्ल भारत और आभार प्रदर्शन अधिवक्ता सुमेश बजाज ने किया। इस मौके पर जस्टिस टीपी शर्मा, जस्टिस मनींद्र मोहन श्रीवास्तव, जस्टिस संजय के. अग्रवाल, जस्टिस पी. सैम कोशी, जस्टिस सीबी बाजपेयी सहित वकील और न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी, लॉ स्टूडेंट्स बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

चीफ जस्टिस यतींद्र सिंह ने कानूनी पेशे में सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग पर अपनी राय रखी।

विषय था, कानूनी पेशे में सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग