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विवाहिता के खिलाफ क्रिमिनल केस सुप्रीम कोर्ट से निरस्त

7 वर्ष पहले
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विवाहिता के खिलाफ 498 के तहत चल रहा मामला सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। बिलासपुर की महिला ने पति, सास-ससुर, देवर समेत विवाहिता ननद के खिलाफ भी मामला दर्ज करवा दिया था। मामला न्यायिक अधिकारी प्रथम श्रेणी की अदालत में लंबित है। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मामला प्रस्तुत किया गया था।

तेलीपारा, बिलासपुर में रहने वाले अनिकेत सलूजा ने फरवरी 2006 में पड़ोस में रहने वाली आकांक्षा अरोरा से प्रेम विवाह किया। तीन माह बाद वह मायके चली गई। इस बीच सलूजा के परिजनों ने दहेज प्रताड़ना के मामले में परिवार को फंसाने की धमकी देने की शिकायत सिटी कोतवाली में की। मायके में दो साल रहने के बाद आकांक्षा ने पति अनिकेत समेत सास-ससुर, जेठ, देवर और इंदौर में रहने वाली शादीशुदा ननद रीना धवन के खिलाफ 498, 294, 323, 506, 452 और 34 के तहत मामला दर्ज करवाया। साथ ही मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के कोर्ट में धारा 406 का भी मामला दर्ज करवा दिया था। इस बीच अनिकेत की हादसे में मौत हो गई। रीना धवन के 498 का प्रकरण दर्ज करने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की। हाईकोर्ट से खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका प्रस्तुत की गई थी। सीजेआई आरएम लोढ़ा, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस रोहिंटन नरीमन ने याचिका मंजूर करते हुए न्यायिक अधिकारी प्रथम श्रेणी की अदालत में लंबित मामले से रीना धवन का नाम रद्द कर दिया है।

नाबालिग को भी बनाया था आरोपी

मामलेमें नाबालिग रौनक सलूजा को भी आरोपी बनाया गया था। किशोर न्यायालय ने रौनक का नाम हटाने का आदेश दिया था। बाद में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने उसका नाम हटाने का आदेश दिया था। गौरतलब है कि गलत सर्टिफिकेट प्रस्तुत कर रौनक को बालिग बताने का प्रयास किया गया था।