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निगम, प्रशासन स्वास्थ्य महकमे के रहते लोग डायरिया-पीलिया के शिकार
अपोलो में भर्ती स्वाइन फ्लू पीड़ित का इलाज जारी
प्रशासन की सरपरस्ती में नगर निगम और स्वास्थ्य महकमे का करम है कि न्यायधानी कचरे और गंदगी से पटी हुई है। शहरभर के मोहल्ले-कॉलोनियों में नालियों के बीच से पेयजल लाइन गुजरी है। नतीजा रहवासी डायरिया, मलेरिया और पीलिया जैसी जानलेवा बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। अब स्वाइन फ्लू की घुसपैठ ने चिंता में डाल दिया है। इसके बाद भी जिम्मेदारों का पहले दावा अब दिखावा है... सबकुछ ठीक है।
डायरिया, मलेरिया, पीलिया हो या फिर स्वाइन फ्लू, सबकी जड़ गंदगी और दूषित पानी है। शहर में जब भी ये बीमारियां पैर पसारती हैं तो ऐसे क्षेत्र ज्यादा प्रभावित होते हैं, जहां चारों ओर कूड़ा-करकट, बजबजाती नालियां और टूटी-फूटी पानी की पाइप लाइन हों। हालांकि ये तस्वीर शहरभर में है, लेकिन अरपा नदी किनारे बसे तोरवा, दोमुहानी, लिंगियाडीह, राजकिशोर नगर, चिंगराजपारा, चांटीडीह तो तालाबों के किनारे बसे टिकरापारा, तालापारा, कस्तूरबा नगर में हालत ज्यादा संजीदा होती है।
रेलवेके चार पंप हाउस, सभी गंदगी से पटे
तोरवामें नदी किनारे चार पंप हाउस हैं। इनसे रेलवे काॅलोनी सहित ट्रेन की बोगियों तक पानी सप्लाई होती है। शेषपेज|18
इसकेबाद भी पंप हाउस और इसके आस-पास कभी साफ-सफाई नहीं की गई। सभी में गंदगी से पटी है। नवंबर में पुल से लगे पंप हाउस में क्लोरीन डाेजिंग मशीन लगाई गई थी, अब वह भी दिखाई नहीं देती। यह क्षेत्र कभी सुसाइड प्वॉइंट हुआ करता था, अब शराबियों का अड्डा है। दिनदहाड़े यहां शराब की बिकती दिखी। पंप हाउस के ऊपर अहाता भी बना लिया गया है।
^नसबंदी कांड से बहुत सीखा। अब तैयार हैं। -डाॅ.एसपी सक्सेना, सीएमएचओ बिलासपुर
^सफाई पुख्ता नहीं। अभी तो पेयजल लाइन बदलेंगे। -किशोरराय, मेयर नगर निगम बिलासपुर
^हम बैठक लेते हैं, वैसे सफाई निगम का काम। -एसआरकुर्रे, संयुक्त कलेक्टर
यह तस्वीर है बंधवापारा क्षेत्र की जहां मानसून के दरम्यान समूचा इलाका जलमग्न हो जाता है। बाकी समय नाले बहते रहते हैं।
ताेरवा क्षेत्र में नालियों से गुजरे पाइप से इस तरह भरना पड़ रहा पीने का पानी।
निगम ने इंतजाम नहीं किए तो तालाब में कचरा
टिकरापारा स्थित मामा-भांचा तालाब के आस-पास की स्थिति भी नहीं सुधरी। रहवासी सोनू खटीक का कहना है कि मोहल्ले के लोग मजबूरी में तालाब में कचरा फेंकते हैं, क्योंकि निगम ने इसके लिए डिब्बे नहीं रखवाए हैं। यही स्थिति करबला और जतियापारा तालाब के आस-पास के रिहायशी इलाकों की है।
तालापारा में हर ओर
गंदगी, पानी भी दूषित
तालापारामें डायरिया की मुख्य वजह दूषित पेयजल और चांदमारी तालाब की गंदगी है। पेयजल सप्लाई लाइन गंदगी के बीच से गुजरी है। मौके पर मिले शेख अख्तर अली बताते हैं कि निगम तो कभी नालियों की सफाई करवाता है और तालाब की। टूटी-फूटी पेयजल लाइन से पानी के सहारे घरों तक पहुंची गंदगी बीमार कर रही है।
दो महीने पहले जैसे हालात फिर हैं
तोरवा,देवरीखुर्द, कुटीपारा, दोमुहानी, लिंगियाडीह, चांटीडीह क्षेत्र में दो महीने पहले 50 से ज्यादा लोग डायरिया के शिकार हुए। अब नदी में गंदा पानी कम है, लेकिन स्थिति नहीं सुधरी है। कुएं और हैंडपंप से मटमैला पानी निकल रहा है, जिससे डायरिया और पीलिया तो जगह-जगह इकट्ठे गंदे पानी और कचरे से मलेरिया का खतरा है।