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कभी भी सकती है सीसीआईएम टीम

6 वर्ष पहले
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आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय में सीसीआईएम यानी सेंट्रल काउंसिल आॅफ इंडियन मेडिसिन टीम के निरीक्षण के लिए जोर-शोर से प्रयास किए जा रहे हैं। टीम किसी भी दिन यहां पहुंच सकती है।

निरीक्षण के लिए बीएएमएस फर्स्ट ईयर के कॉमन हॉल को हटा कर उसकी जगह सेकेंड ईयर के क्लासरूम तैयार किए जा रहे हैं। अलमारी, कुर्सी - टेबल और सिलेबस के अनुसार नई किताबें खरीदी जा रही हैं। हॉस्पिटल में महीनों से धूल खा रहे बेड को साफ कर उन्हें मरीजों से भरने की तैयारी है। गौरतलब है कि आयुष ने यही प्रक्रिया वर्ष 2014 में भी की थी। 60 सीट की मान्यता मिल गई, अब जबकि सेकेंड ईयर की मान्यता लेनी है तो फिर वही दिखावे की प्रक्रिया शुरू की गई है।

राजधानी रायपुर के आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय में सीसीआईएम टीम का दौरा पूरा हो चुका है। अब तीन सदस्यीय टीम न्यायधानी किसी भी दिन पहुंच सकती है। लिहाजा काॅलेज अस्पताल स्तर पर अलग-अलग तैयारी की जा रही है। सेकेंड ईयर के लिए पर्याप्त बैठक व्यवस्था दिखाने फर्स्ट ईयर के छात्र-छात्राओं के अलग-अलग काॅमन हॉल डेवलप किए जा रहे हंै। फर्स्ट ईयर की लाइब्रेरी से सेकेंड ईयर को जोड़ा जा रहा है। इसके लिए तीन हजार किताबें मंगवा ली गई हैं, जबकि दो हजार और आनी हैं। अलमारियां भी मंगवाई गई हैं। प्रैक्टिकल के लिए शव गृह दुरुस्त किया जा रहा है।

इस बार 12 लाख से ज्यादा खर्च होगा

पंचकर्म कक्ष अब सातों दिन खुलेगा

खुल गए भर्ती कक्ष, धूल खाते बेड साफ हुए

सीसीआईएम टीम न्यायधानी के काॅलेज और अस्पताल का दौरा तीन बार कर चुकी है। हर बार उनके रहने और खाने-पीने पर लगभग 20 हजार रुपए तो 30 हजार रुपए अस्पताल काॅलेज में दिखावे पर लगे। इस हिसाब से अभी तक डेढ़ लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। पिछले साल अस्पताल के लिए शासन से 11 लाख रुपए स्वीकृत हुए थे। अब 12 लाख खर्च होने की स्थिित है।

जिन्हें तैयारी पर खर्च होना बताया गया। इस बार केवल अस्पताल पर 11 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके अलावा कॉलेज के लिए जुटाए जा रहे संसाधन और साज-सज्जा और टीम के खाने-पीने, रहने का खर्च अलग से रहेगा।

आयुर्वेद अस्पताल में पंच कर्म सेक्शन भी है। आमतौर पर यह सप्ताह में एक दिन यानी शनिवार को खुलता है, वह भी रेगुलर नहीं। अब जबकि जांच टीम आने वाली है तो इस सेक्शन को नियमित खोला जा रहा है। यहां भी साफ-सफाई कर दी गई है। कुछ मॉडल्स सजा दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक पंचकर्म विभाग के माध्यम ये प्रायोजित यानी एवजी क्षार सूत्र के मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर लिया गया।

आयुर्वेद अस्पताल में महीनों से बंद पड़े मरीजों के भर्ती कक्ष खोल दिए गए हैं। धूल खाकर गंदे हो चुके बिस्तरों को झाड़-बुहार दिया गया है। अब तैयारी है एवजी के मरीजों को लाने की। गौरतलब है कि पिछले साल सीसीआईएम टीम का दौरा होने वाला था, तब भी ऐसी ही व्यवस्था जुटाई गई थी। भाड़े के मरीजों को बुलाकर भर्ती किया गया था।

अलग से कुछ नहीं यह तो रूटीन है

सेकेंड ईयर की मान्यता को लेकर सीसीआईएम टीम यहां कब पहुंचेगी?

{इसमहीने दौरा होना है, टीम कौन सी तारीख को पहुंचेगी नहीं मालूम। दरअसल, वे बिना जानकारी दिए अचानक पहुंचते हैं।

मान्यताप्राप्त करने अस्पताल काॅलेज में क्या खास तैयारियां हो रही हैं?

{अस्पतालकाॅलेज में जो भी काम चल रहे हैं, रुटीन हैं। कोई तैयारी नहीं कर रहे हैं।

ऐसाहै जो काम पहले हो जाने थे, अब क्यों करवा रहे हैं? अस्पताल में महीनों से बंद वार्ड खोल दिए गए हैं। जबरदस्ती मरीजों को भर्ती करने की कवायद चल रही है। क्या पिछली बार की तरह इस बार भी एवजी मरीज बुलाए जाएंगे?

{ऐसानहीं है, सारे काम रुटीन हैं।