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महावर कंपनी संचालक बाप-बेटे चकरभाठा पुलिस की कस्टडी में
कविता फार्मेसी ने टेबलेट खरीदी 51 हजार, सप्लाई तीन लाख की
बिलासपुर. नसबंदीकांड में दवा सप्लाई करने वाली रायपुर की महावर कंपनी के संचालकों को कोर्ट ने दो दिन की पुलिस रिमांड पर चकरभाठा पुलिस को सौंप दिया है। दोनों से पूछताछ शुरू कर दी गई है। अदालत में उन्हें पुलिस रिमांड पर देने का पांच वकीलों ने एक साथ विरोध किया।
सिप्रोसिन दवा बनाने वाली कंपनी के संचालक 62 वर्षीय रमेश महावर और 35 वर्षीय सुमीत महावर पिता-पुत्र हैं। दोनों न्यायिक रिमांड पर रायपुर जेल में थे। चकरभाठा पुलिस ने दोनों को प्रोडक्शन वारंट के जरिए बिल्हा कोर्ट बुलवाया था। यहां उनकी औपचारिक गिरफ्तारी की गई। इसके बाद फिर दोनों जेल भेज दिए गए। उनसे पूछताछ नहीं हो पाई थी। शेषपेज |14
शनिवारको दोनों आरोपियों को बिल्हा कोर्ट में उपस्थित होना था। पुलिस उन्हें रिमांड पर लेने पहले से प्रयास में जुटी थी। उनके आने पर चकरभाठा पुलिस ने कोर्ट में आवेदन देकर पांच दिनों की पुलिस रिमांड मांगी। कोर्ट ने केवल दो दिनों के लिए उन्हें पुलिस रिमांड पर सौंपा है। इस दौरान उनसे दवा बनाने और सप्लाई करने के बारे में पूछताछ की जाएगी। इधर, कोर्ट में पुलिस रिमांड का विरोध करने कंपनी संचालकों ने पांच वकील लगाए थे। आरोपी इस समय चकरभाठा पुलिस के सुपुर्द हैं। पुलिस दोनों को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई। यहां उनका मुलाहिजा करवाया, फिर चकरभाठा थाने ले गई। यहां उनसे पूछताछ की जाएगी। दोनों 15 दिसंबर तक पुलिस कस्टडी में रहेंगे।
<52 प्रकार की दवाएं बनती थीं फैक्टरी में
रायपुर स्थित महावर कंपनी में वर्ष 1982 से दवाइयां बनाई जा रही थीं। पहले महावर का मेडिकल स्टोर था। संचालक दवा कारोबार में 1973 से हैं। कंपनी के पास सिप्रोसिन समेत 52 तरह की दवाइयां बनाने के लाइसेंस हैं।
खुद दवा बनाने का संदेह गहराया
कविताफार्मेसी के पास बाकी की 2.49 लाख टेबलेट्स आखिर कहां से आईं, इसकी पुलिस जांच कर रही है। आशंका है कि उसने यह दवा खुद ही बनाई होगी।
इस तरह के सवाल पूछे जाएंगे
{दवा का बैच कैसे एलाॅट होता है
{सिप्रोसिन दवा कैसे बनाई गई थी
{इसकी सप्लाई कहां-कहां की गई थी
{इसका टेस्ट किसने किया था
{लाइसेंस में टेस्ट के लिए कौन अधिकृत है
पुलिस की जांच में नया खुलासा, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भेजी गई थ