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रातभर छापेमारी, कोल डिपो वाले भूमिगत

7 वर्ष पहले
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हिर्री क्षेत्र में चल रहे कोल डिपो संचालक एकाएक भूमिगत हो गए हैं। सालों से पुलिस की मिलीभगत से जिन डिपो में कोयले की अफरा-तफरी जारी थी, वहां सन्नाटा पसरा हुआ है। शुक्रवार की देर रात पुलिस की टीम ने कई डिपो में छापे मारे, लेकिन सभी स्थानों पर ताले लटके मिले। डिपो संचालक पुलिस के इरादों को भांपकर भूमिगत हो गए हैं।

रेंज में अवैध कोयले का कारोबार बंद करवाने के लिए आईजी पवन देव ने सख्त रवैया अपनाया है। सभी प्रमुख पुलिस अधिकारियों को इसके लिए निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने तीन महीने का अल्टीमेटम दिया था, जो खत्म हो गया है। आईजी ने कोरबा जाते समय एक डिपो में खुद ही छापा मारा था। बाद में उनकी टीम ने हिर्री क्षेत्र में अवैध डिपो पकड़ा। अवैध कारोबार रोकने पर उन्होंने हिर्री टीआई की दो वेतनवृद्धि रोक दी थी। दूसरे-तीसरे दिन हिर्री पुलिस ने कार्रवाई की। शुक्रवार रात एएसपी ग्रामीण के साथ पुलिस की टीम 3 से 4 बजे के बीच हिर्री-सरगांव क्षेत्र के डिपो में पहुंची, लेकिन यहां से खाली हाथ लौटना पड़ा। सभी डिपो में ताले लगे थे।

एक दिन पहले किरना से जब्त किए गए थे वाहन।

हिर्री क्षेत्र में 47 वैध काेल डिपो हैं। इनके पास लाइसेंस है। इससे कहीं अधिक संख्या अवैध कोल डिपो की है। सभी को मिलाकर करीब 150 डिपो संचालित हैं, जहां लिंकेज का कोयला खपाया जाता है। वैध डिपो वाले भी अवैध कारोबार करते हैं। यहां लिंकेज का कोयला उतारकर मिक्सिंग के बाद गंतव्य के लिए भेज दिया जाता है।

अंजाम तक नहीं पहुंचती कार्रवाई

कोयलेका अवैध कारोबार रोकने के लिए पुलिस हर साल कार्रवाई करती है, लेकिन इसे अंजाम तक नहीं पहुंचाया जाता। पुलिस का कहना है कि खनिज विभाग अपना काम नहीं करता। खनिज विभाग अगर ऐसे डिपो का लाइसेंस निरस्त कर दे तो कारोबारियों को मौका ही नहीं मिलेगा।

हिर्री क्षेत्र में 47 को लाइसेंस, लेकिन 150 से अधिक प्लाॅट