...और शाम डूब गई प्रभु की आराधना में
भगवान को भी पसंद आती है गीत-संगीत की भाषा
तनाव को दूर करने की अचूक दवा संगीत है। उस पर जब भजन हों तो श्रोता को सीधे आध्यात्म से जोड़ देते हंै। भगवान को भी संगीत की भाषा पसंद है। यही वजह है कि इस विधा के माध्यम से उनकी प्राप्ति भी सरल है।
आर्ट आॅफ लिविंग द्वारा शनिवार को आयोजित सुमेरु संध्या कार्यक्रम में शिरकत करने शहर पहुंचे भजन गायक गौतम डबीर ने ये बातें भास्कर से चर्चा में कहीं। उन्होंने कहा कि संगीत से उनका जुड़ाव तो बचपन से था, मगर गजल या फिल्मी गायन तक सीमित थे। उस वक्त उनके जीवन को कोई दिशा नहीं मिल पा रही थी। कई लक्ष्य साध कर चल रहे थे, जिससे डिप्रेस्ड रहने लगे। मगर वर्ष 2000 में जब आर्ट आॅफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव रविशंकर से उनकी मुलाकात हुई तो जीवन की दिशा ही बदल गई। उन्होंने उनकी गायकी को सेवा कार्य से जोड़ते हुए भजन गायकी की ओर रुख करने की बात कही। आज वे इस बात को लेकर प्रसन्न हैं कि अपनी विधा के माध्यम से सिर्फ खुद सुखी तनाव मुक्त हैं, बल्कि दूसरे भी लाभांवित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि मनुष्य मूलत: शांतिप्रिय तनावमुक्त जीवन जीना चाहता है। विपरीत परिस्थितियों में पड़कर वह गुस्से तनाव से अपने मन को भर लेता है। ऐसे में जब उसे इससे उबरने की तकनीक नहीं मालूम होती तो वह डिप्रेस्ड होने लगता है। यह स्थिति उसे उसके परिवार को पतन की ओर ले जाती है। आर्ट आॅफ लिविंग लोगों को ऐसी परिस्थितियों से बचते हुए जीवन जीने की कला सिखाता है। इस कला में सुदर्शन क्रिया, योग-प्राणायाम के साथ ही संगीतमयी आराधना भी शामिल है। गौरतलब है कि डबीर सोनी इंटरटेन्मेंट में कार्यक्रम प्रमोटर भी रहे हैं। उन्होंने फेकल्टी आॅफ जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री प्राप्त की है।
गीत-संगीत पेश करते गायक डबीर अन्य कलाकार।