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सिम्स और जिला अस्पताल की बिल्डिंग के हर कोने को ‘इलाज’ की जरूरत है
भवन बनाने में गड़बड़ी और मेंटेनेंस नहीं होने की वजह से छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) और जिला अस्पताल की बिल्डिंग समय से पहले जर्जर होने लगी हैं। जबकि पीडब्ल्यूडी ने सिम्स और जिला अस्पताल के कई भवन और कमरे अब तक हैंडओवर नहीं किए हैं। नतीजतन मरीजों के लिए बेहद जरूरी सुविधाएं शुरू नहीं हो पा रही हैं।
गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने 15 साल पहले सिम्स की बिल्डिंग का निर्माण करवाया था। संभाग में यह सबसे बड़ा भवन है, लेकिन रखरखाव नहीं होने से जर्जर होने लगा है। जगह-जगह से पानी का सीपेज बिल्डिंग की खूबसूरती में ग्रहण लगा रहा है। कुछ हिस्सा अभी भी खाली है, ये ड्रेनेज लाइन से नहीं जुड़ा है। कुछ हिस्से ऐसे हैं, जहां पर स्ट्रक्चर खड़ा है लेकिन पानी, बिजली और नाली जैसी बुनियादी चीजें नहीं हैं। ऐसे में वर्षों से बंद पड़े हिस्से में धूल और कबाड़ जमा हैं।
पानीकी पाइप लाइन में लीकेज: सिम्सकी बिल्डिंग में दर्जनों टाॅयलेट्स हैं। इन सभी में पाइप की फिटिंग अंडरग्राउंड है। पानी लाइन के साथ सीवर लाइन भी अंडरग्राउंड हैं। इनमें से कौन की पाइप लाइन कहां से लीक है, यह पता नहीं चल पा रहा है। बिल्डिंग का कोना-कोना सीलन की वजह से खराब हो रहा है। कुछ हिस्सों में तो झरने सा पानी टपकता है।
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कॉलेजबिल्डिंग का निर्माण गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने करवाया था। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने कॉलेज छोड़ा तो बिल्डिंग मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को सौंपी गई। पांच साल तक वही मेंटेनेंस करवाता रहा। दो साल पहले मेडिकल कॉलेज बिल्डिंग पीडब्ल्यूडी को सौंपने की प्रक्रिया शुरू हुई। इस बीच पीडब्ल्यूडी ने सिम्स प्रबंधन से जमीन और उस पर करवाए निर्माण से संबंधित दस्तावेज मांगे। यह औपचारिकता पूरी नहीं हुई। अभी भी मेंटेनेंस की राशि सिम्स प्रबंधन पीडब्ल्यूडी को दे रहा है।
पांच साल में ही जिला अस्पताल का भवन जर्जर हो गया है
पांचसाल पहले बनकर तैयार हुई जिला अस्पताल की बिल्डिंग जर्जर होने लगी है। मेंटेनेंस नहीं होना सबसे बड़ी वजह है। यह बिल्डिंग पीडब्ल्यूडी के अधीन है, जो सालाना लाखों रुपए इस पर खर्च करने का दावा करता है। बिल्डिंग के पीछे का हिस्सा सीपेज की वजह से गीला रहता है। भवन का रंग-रोगन भी उसी वजह से खराब हो चुका है। अब मरम्मत में पीडब्ल्यूडी 16 लाख रुपए खर्च करेगा। इसमें सीव