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जिनके पास कार, वे राशन कार्ड के हकदार नहीं
राज्यशासन जल्द यह निर्णय ले सकता है कि जिनके पास कार है, उन्हें राशन कार्ड दिए जाएं। जिन्हें दिए गए हैं, उनसे वापस लिए जाएं। हालांकि इसमें कुछ सवाल हैं जो अड़चन पैदा कर सकते हैं। मसलन, किसी के पास अगर पुरानी या सस्ती कार है तो ऐसे परिवार इस दायरे में आएंगे या नहीं। किसके पास कार है, इसकी तस्दीक कैसे होगी। अक्सर लोग जानकारी छिपाकर शासकीय योजनाओं का लाभ लेते हैं। बहरहाल, नोटिफिकेशन जारी करने के लिए खाद्य विभाग को वित्त विभाग की मंजूरी का इंतजार है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली को प्रदेश में चला पाना मुश्किल हो रहा है। राज्य शासन के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती है, लेकिन इस मामले में अधिकारी कुछ बोलने से बचते हैं। दरअसल, इस योजना की सबसे बड़ी एकमात्र मुसीबत है राशन कार्डों की बढ़ती तादाद। विधानसभा चुनाव के पहले राज्य में 45 लाख राशन कार्ड थे, जो अब बढ़कर 70 लाख से अधिक हो गए हैं। ऐसे में चुनाव खत्म होने के बाद से उपाय किए जा रहे हैं, जिनसे कार्डों की संख्या बजट पर काबू पाया जा सके। कार्ड सत्यापन करवाने के साथ ही एकल सदस्यीय परिवारों को 35 की जगह 10 किलो मुफ्त चावल देने का निर्णय लिया गया। जनता और फिर कांग्रेस के विरोध के चलते शासन को फैसला बदलना पड़ा। अधिकारियों को पता चला कि बड़ी संख्या में ऐसे लोगों ने कार्ड बनवा रखे हैं, जो कार मेंटेन करते हैं। अगर इन्हें नहीं रोका गया तो आगे भी अपात्रों द्वारा ऐसा किया जाएगा। यही वजह है कि जल्द ही ऐसे परिवारों को कार्ड के लिए अपात्र घोषित करने की तैयारी है, जिनके पास कार है। खाद्य सुरक्षा अधिनियम में तृतीय वर्ग से ऊपर के सरकारी कर्मचारियों के अलावा शहरी क्षेत्र में एक हजार वर्गफीट के पक्के मकान वालों और आयकरदाताओं को पहले से अपात्र माना गया है। कार वाले परिवारों को अपात्र माने जाने का उल्लेख नहीं है, जिसके संबंध में जल्द ही नोटिफिकेशन जारी होगा। इस संबंध में एक प्रस्ताव बनाकर संशोधन सुझाव के लिए वित्त विभाग के पास भेजा गया है।
1. कैसेपता लगाएंगे, किसके पास कार है और किसके पास नहीं है?
2.अगरकिसी ने सस्ती सेकेंड हैंड कार खरीदी तो उसे क्या माना जाएगा?
दो सवाल, जिससे उलझ सकता है पूरा मामला
1. कैसेपता लगाएंगे, किसके पास कार है और किसके पास नहीं है?
2.अगरकिसी ने सस्ती सेकेंड हैंड कार खरीदी तो उसे क्या माना जाएगा?
बड़े बदलाव की तैयारी