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साईं की मूर्तियां नहीं, लोगों का अंधविश्वास तोड़ेंगे: स्वरूपानंद
साईंबाबा को भगवान मानने के विवादित बयान से सुर्खियों में आए जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा है कि वे साईं की मूर्तियां नहीं, उनसे लोगों में उनसे जुड़ा अंधविश्वास तोड़ना चाहते हैं। देश में सभी को वाणी की स्वतंत्रता है। अगर उन्होंने कहा है कि साईं भगवान नहीं हैं तो इसमें गलत क्या है। धर्म संसद के प्रस्ताव को असंवैधानिक बताया जाता है और उनकी तस्वीर पर जूतों की माला पहनाई जाती है तो क्या यह सही है।
सोमवार को चिचिरदा में हरीश शाह के निवास पर अपने शिष्यों के साथ पहुंचे द्वारिका शारदा ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद मंगलवार को मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि हिंदू देवी-देवताओं की जगह साईं की तस्वीर बनाकर बेची जा रही है। महाभारत में भगवान कृष्ण ने विराट रूप दिखाया था और तस्वीरों में कृष्ण की जगह साईं की फोटो लगी है। कृष्ण बांसुरी बजाते थे और तस्वीरों में कृष्ण की जगह साईं नजर रहे हैं। हनुमान पहाड़ उठाए हुए हैं और पहाड़ पर साईं दिख रहे हैं। शंकराचार्य ने कहा, सनातन धर्म के खिलाफ साजिश रची जा रही है। कवर्धा के धर्म संसद में छह प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें से एक था कि साईं, ईश्वर, संत या गुरु नहीं हैं। इसे लेकर विरोध शुरू हो गया। गृहमंत्री ने कवर्धा की धर्म संसद को असंवैधानिक करार दे दिया। साईं की मूर्तियों की रक्षा के लिए सुरक्षाकर्मी नियुक्त कर दिए गए। शेषपेज|15
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वेतो साईं की मूर्तियां हटाना चाहते हैं और तोड़ना, बल्कि लोगों में साईं के प्रति फैले अंधविश्वास को तोड़ना चाहते हैं। कुछ लोगों ने कहा कि वे उनकी आस्था पर प्रतिबंध लगा रहे हैं। आस्था का अर्थ होता है, श्रद्धा और श्रद्धा श्रद्धेय के प्रति होती है। इसका चुनाव कल्पना से होने पर यह धार्मिक नहीं हो सकेगा। उन्होंने कहा, धर्म काल्पनिक नहीं है, यह शास्त्रों से प्रमाणित है। साईं कल्पना हो सकते हैं, धर्म नहीं। उन्होंने किताब \\\"साईं का सच\\\' में लिखी बातों की वकालत की।
भगवान के साथ साईं की तस्वीरें दिखाते हुए स्वरूपानंद।
सीताराम को बदलकर साईंराम क्यों?
शंकराचार्य ने कहा, साईं को साजिश के तहत भगवान बनाया गया। उनकी पूजा कर रहे हैं, आरती उतार रहे हैं, लोग यह तो पता कर लें कि वे पूजा किसकी कर रहे हैं। शंकराचार्य ने कहा कि धर्म से देश की रक्षा होती है। नेहरू से