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गियान के परब ‘बसंत पंचमी’

5 वर्ष पहले
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12 फरवरी विशेष
रितुराज बसंत-सुघरई लाथे
खुसी अऊ उमंग के तिहार
ह्म ले अकास, अकास ले हवा, हवा ले आगी, आगी ले ओंकार, ओंकार ले गायत्री, गायत्री ले सावित्री, सावित्री ले सरसती, सरसती ले बेद अऊ बेद ले जमो लोक के उत्पत्ति माने गे हे।

परकिरिति के पांच ठन देवी हे। दुरगा, लछमी, सावित्री (गायत्री), राधा अऊ सरसती। बसंत-पंचमी के दिन देवी सरसती के पूजा होथे। ये ह गियान ल उत्पन्न करइया देबी आय। स्वर, संगीत अऊ ग्यान के अधिस्ठात्री देवी आय। मइनखे मन बुद्धि, प्रतिमा अऊ स्मरन-सक्ति इंकरे किरपा ले प्राप्त करथें। दाई सरसती एक हाथ म पुस्तक अऊ एक हाथ म बीना धरे रइथे। कुन्द-पुस्प, चन्दरमा अऊ बरफ के माला सरीखे सुन्दर सादा ओनहा पहिरे रहिथे। तीनों देव ब्रह्मा, बिस्नु अऊ महेस द्वारा पूजित होथे। रिसि, मुनी, देवता, दानव, मइनखे सब्बो झन इखर चरन म मुंड़ नवाथें। श्री हृी सरस्वत्यै स्वाहा।। ये अस्टाछर मंत्र परम सेस्ठ अऊ सबो बर बने आय। ये मंत्र के जाप बड़े-बड़े रिसि-मुनी मन भी करे रहीन। ये मंत्र के परभाव ले मूरूख अऊ जड़ मइनखे मन भी बिद्वान अऊ पंडित बन जाथे।

हमर पुरान म एक परसंग भी मिलथे जेकर अनुसार दाई सरसती हर भगवान किस्न के रूप ल देख के मोहित होगिन अऊ उनमन ल पति के रूप म पाय के इच्छा करे लगीन। जब ये बात किस्न ल पता चलीस त उनमन दाई सरसती देवी ल कहिन कि मय तो सबके स्वामी आंव पर मोर हिरदे के स्वामी केवल राधा आय। राधा मोर प्रानअधार आय इकर सेती तुमन बिस्नु जी लगन जावा ओही ल पति के रूप म वरन करा। उनकरो म मोर अंस हे उमन मोरे समान सर्वगुन सम्पन्न अऊ परम सुंदर हे तुमन बैकुंठ म जावा अऊ आनंद पूरक रहा। भगवान बिस्नु तुमन ल सम्मान देहीं। अऊ मय तुमन ल बरदान देवत हावव कि आज ले परलय परियंत तक जेन मइनखे माघ महीना के सुक्ल पछ पंचमी के दिन तुंहर पूजा करही ओला तुंहर किरपा प्राप्त होही। पूरा ब्रह्मांड म तुंहर पूजा होही अइसे कहि के स्वयं भगवान किस्न पूजा करे रहीन तभे ले दाई सरसती देवी सर्वपूजित होगीन। माघ सुक्ल पंचमी हर बिद्या आरंभ करे बर सुभ माने जाथे। ए दिन हर स्वयं सिद्ध मुहुरत होथे। बसंत-पंचमी के दिन जमो स्कूल, कॉलेज, संगीत बिद्यालय म दाई सरसती के सरद्धा अऊ भक्ति ले पूजा-पाठ हर हाेथे। बसंत के अरथ हे- उत्साह, उमंग अऊ सिंगार। बसंत रितु ह अपन संग किसम-किसम के रंग अऊ महक ल लेके आथे।

नवा काम के शुरुआत
सरसती स्वर, संगीत अऊ गियान के देबी आय, रिसि, मुनि, देवता, दानव, मइनखे इखर चरन म मुंड़ नवाथें, बसंत रितु अपन संग किसम-किसम के रंग लेके आथे।
महेंद्र देवांगन गोपीबंद पारा, पंडरिया

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