जिस गांव में नक्सलियों की सूचना मिली, वहां तक नहीं पहुंची पुलिस
सलवा जुड़ूम में शामिल कांग्रेस नेताओं की जानकारी नहीं
जगदलपुर क्षेत्र के बाढ़नपाल और ककालगुड़ में 19 व 22 मई 2013 को नक्सली कमांडर देवा और अन्य नक्सलियों के होने की सूचना मिली थी, लेकिन पुलिस ने वहां सर्चिंग नहीं की। नक्सली सेल, जिला विशेष शाखा और स्थानीय स्तर पर ऐसी सूचनाएं पुलिस विभाग तक पहुंचती हैं। इनमें से एलआईबी को छोड़कर बाकी का रिकार्ड नहीं रखा जाता। न्यायिक आयोग में झीरम मामले की सुनवाई के दौरान जगदलपुर के तत्कालीन एसपी मयंक श्रीवास्तव ने प्रतिपरीक्षण में ये जानकारी दी। वर्तमान में श्रीवास्तव दुर्ग के एसपी हैं। मामले की अगली सुनवाई 23 व 24 फरवरी को होगी।
25 मई 2013 को जगदलपुर जिले के दरभा थाना क्षेत्र स्थित झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमला कर दिया था। इसमें कांग्रेस नेता नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा समेत 30 से अधिक कांग्रेसी मारे गए थे। जस्टिस प्रशांत मिश्रा की अध्यक्षता में मामले की न्यायिक जांच चल रही है। बुधवार को एसपी मयंक श्रीवास्तव का प्रतिपरीक्षण हुआ। इससे पहले अगस्त 2015 में उनका प्रतिपरीक्षण अधूरा रह गया था। उन्होंने बताया कि नक्सलियों के मामले में जिला स्तर पर आने वाली सूचनाओं का रिकार्ड नहीं रखा जाता। तस्दीक करने के बाद सर्चिंग लायक होने पर कार्रवाई की जाती है।
एसपी ने बताया सलवा जुड़ूम में शामिल बस्तर, दंतेवाड़ा व बीजापुर के कांग्रेस नेता सत्तार अली, विक्रम मंडावी, अजय सिंह और अवधेश गौतम के परिवर्तन यात्रा में शामिल होने की सूचना बस्तर पुलिस को नहीं थी। यह सूचना घटना के बाद अवधेश गौतम ने दरभा थाने से कॉल कर उन्हें दी। नक्सलियों की हिट लिस्ट में शामिल सभी नेताओं की जानकारी तक पुलिस को नहीं थी। लैंड माइंस ब्लास्ट से ठीक पहले अवधेश गौतम की गाड़ी थी, वे नक्सलियों की हिट लिस्ट में थे और उनके घर पर पहले भी हमला हो चुका था। 1 से 23 मई 2013 तक की नक्सली सूचनाओं का रिकार्ड नहीं है। उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि एलआईबी की सूचनाओं का रिकार्ड क्यों रखा जाता है?
आयोग के सामने उपस्थित हुए एसपी मयंक।
शासन की रिपोर्ट को गलत बताया
शासन ने आयोग के समक्ष 20 सूचनाओं की रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इसमें क्षेत्र में नक्सलियों के होने की सूचना बताई गई थी। आयोग के समक्ष प्रतिपरीक्षण के दौरान एसपी श्रीवास्तव ने इन सूचनाओं को गलत बताया। कई क्षेत्र में जहां पर नक्सली होने की सूचना मिली।
ओडिशा से लगा हुआ क्षेत्र
दरभा थाना क्षेत्र ओडिशा की ओर मलकानगिरि, सुकमा और दंतेवाड़ा से लगा हुआ है। ये 20-25 किमी दूर हैं, जहां से एक दिन में पैदल लौटा जा सकता है। वहीं, रास्ता कठिन होने के कारण मलकानगिरि से लौटना मुश्किल है।
आयोग ने जताई नाराजगी
एसपी मयंक श्रीवास्तव ने कांग्रेस अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव के सवाल पर कहा कि आईजी ने बैठक ली थी। इस पर आयोग ने पूछा उस बैठक में क्या हुआ, किस विषय पर बैठक हुई और उसकी तारीख क्या थी। इसका जवाब नहीं दे पाने पर आयोग ने गहरी नाराजगी जताई। सुनवाई में कांग्रेस की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव, देवेंद्र प्रताप सिंह, शासन की ओर से राजीव श्रीवास्तव थे। वहीं कांग्रेस के प्रदेश सचिव डॉ. विवेक बाजपेयी, शासन के संधारक सुभाष सिंह सहित अन्य उपस्थित थे।
नक्सल क्षेत्र में स्थिति नाजुक
नक्सल क्षेत्र में स्थिति जटिल व नाजुक है। यहां सूचनाएं लीक होने पर मुखबिर की जान जाने का खतरा रहता है। यह एक गंभीर प्रशासनिक प्रक्रिया है। नक्सली गांव से बाहर जाने वाले व्यक्ति की जानकारी रखते हैं और मुखबिरी का शक होने पर उसकी हत्या कर देते हैं। सभी स्तर पर मुखबिर की पहचान सुरक्षित रखनी होती है। जिस दिन नक्सली गतिविधियों की सूचना आसानी से पुलिस को मिलने लगेगी, उसी समय उन पर कार्रवाई की जा सकती है। एलआईबी, जिला विशेष शाखा और नक्सल सेल की सूचना पर कार्रवाई में सुरक्षागत कारणों से अंतर होता है।
एसपी मयंक आयोग के सामने हुए उपस्थित, अगली सुनवाई 23 को