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क्रोकोडायल पार्क के सामने मगरमच्छ ट्रेन से कटा

5 वर्ष पहले
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बिलासपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर कोतमी सोनार स्थित क्रोकोडायल पार्क के ठीक सामने शुक्रवार सुबह 6 बजे ट्रेन से कटकर एक मगरमच्छ की दर्दनाक मौत हो गई। घटनास्थल पार्क से बमुश्किल आधा किलोमीटर दूर है। मृत मगरमच्छ नर था और उसकी आयु 3 से 4 वर्ष के करीब बताई जा रही है। क्रोकोडाइल पार्क के सामने हुए इस हादसे से पार्क प्रबंधन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग गए हैं। कोतमी सोनार प्रदेश में मगरमच्छ के गांव के रूप में जाना जाता है। छत्तीसगढ़ का पहला क्रोकोडाइल पार्क यहां वर्ष 2007 में स्थापित किया गया। बताया जाता है कि सुबह 6 बजे मगरमच्छ स्टेशन के पास रेल की पटरियों को पारकर दूसरी ओर जाने का प्रयास कर रहा था, उसी समय ट्रेन आ गई।

ट्रेन के पहिए के नीचे आने से मगरमच्छ का गला कट गया। इसकी सूचना पार्क के स्टाॅफ को दी गई। वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत मगरमच्छ को संरक्षित श्रेणी में रखा गया है। लिहाजा, प्रावधानों के मुताबिक मगरमच्छ के शव का पोस्टमार्टम अकलतरा के सहायक पशु चिकित्सक श्रीवास्तव से कराया गया।

कोतमीसोनार सहित आस पास के गांवों में हमलावर मगरमच्छों से निजात दिलाने के लिए क्रोकोडाइल पार्क की ओर से उन्हें पकड़वाने पर प्रोत्साहन राशि शुरू की गई। वर्ष 2006 से 2008 तक मगरमच्छों को पकड़ने पर ढाई हजार से साढ़े तीन हजार तक की सहायता दी जाती थी। प्रोत्साहन राशि के लिए गांव वाले मगरमच्छों को बड़ी संख्या में पकड़ कर पार्क के सुपुर्द करने लगे। गांव के तालाबों में मगरमच्छों का आतंक फिर शुरू हो चुका है, परंतु उसे पकड़वाने के लिए पार्क के पास उचित व्यवस्था नहीं है।

मगर व इंसान की दोस्ती के लिए मशहूर गांव
एक जमाने में कोतमीसोनार मगर व इंसान की दोस्ती के लिए मशहूर था। गांव में 32 तालाब हैं और किसी न किसी तालाब में मगर रहता ही था। डेढ़-दो दशक पहले मगर और इंसान की दोस्ती में दरार पड़ गई। लोगों ने इन्हें छेड़ना शुरू किया। मगरमच्छों के हमलों से कुछेक की जान गई। इसके बाद क्रोकोडाइल पार्क बना कर मगरमच्छों के संरक्षण की योजना चलाई गई।

पार्क में मगरमच्छ पकड़ने के लिए जाल नहीं
पार्क के पूर्व प्रभारी छोटेलाल मरकाम का कहना है कि सोढ़िया तालाब में मगरमच्छ के होने की जानकारी महीनेभर पहले मिली थी, परंतु इसे पकड़ कर लाने के लिए उनके पास उचित व्यवस्था नहीं है। मगरमच्छ को पकड़ने के लिए खरीदा गया जाल काफी पुराना हो चुका है। दिसंबर में पाराघाट तालाब से मगरमच्छ को पकड़वाने की मांग की गई थी, उस वक्त विभाग की ओर से पंचायत को अपने जाल के जरिए उसे पकड़ कर पार्क को सौंपने कहा गया था। पार्क के कर्मचारियों की मदद से मगरमच्छ को सुरक्षित पार्क में लाया गया।

क्रोकोडायल पार्क में वर्तमान में 210 मगरमच्छ संग्रहित कर रखे गए हैं और इनकी सुरक्षा के लिए बाउंड्री के साथ काफी ऊंची फेंसिंग की गई है। बताया जाता है कि ट्रेन से कटने वाला मगरमच्छ पास के सोढ़िया तालाब से आया था। तालाब में मगरमच्छ के होने की जानकारी पार्क प्रबंधन को थी। इसके बावजूद उसे पकड़कर पार्क में नहीं लाया जा सका। पार्क और रेलवे स्टेशन के बीच बमुश्किल आधा किलोमीटर दूर है। वहीं, जिस सोढ़िया तालाब से मगरमच्छ के रेलवे लाइन तक पहुंच कर कटने की बात कही जा रही है, उसकी दूरी बमुश्किल 40 मीटर है। तालाब रेलवे स्टेशन के नजदीक है।

मगरमच्छों को पकड़वाने पर प्रोत्साहन बंद

पार्क प्रबंधन की लापरवाही से हुई मौत
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