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योग न करना आत्महत्या के समान: मेहता

5 वर्ष पहले
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जीवन में योग का बड़ा महत्व है। मृत्यु से पहले जिस मनुष्य ने योग नहीं किया, उसे यही समझना चाहिए कि उसने आत्महत्या की है। ये उद्गार व्यासपीठाचार्य पंडित विजय शंकर मेहता ने शुक्रवार को आनंद भवन सुमंगल परिसर लिंक रोड में चल रही श्रीमद् देवी भागवत कथा में प्रवचन करते हुए दिए।

उन्होंने आयोजन के चौथे दिन भागवत महापुराण के छठवें और सातवें स्कंध की कथा सुनाई। इसमें उन्होंने विशेष रूप से योग के महत्व काे बताया। पंडित मेहता ने कहा कि योग एक विज्ञान है, जो मनुष्य को तन और मन दोनों प्रकार से सुदृढ़ बनाता है। मनुष्य यदि स्वयं को जीत ले तो उसका जीवन धन्य हो जाता है। योग हमें स्वयं से लड़ना सिखाता है। अत: जीवन में योग करना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि सृष्टि निर्माण के बाद देव और दानवों में वर्चस्व को लेकर समय-समय पर युद्ध होते रहे। दुर्गम नाम के राक्षस का वध कर देवी दुर्गा कहलाईं। इसी क्रम मेें एक हलाहल नाम के दैत्य का संसार में कहर बढ़ने लगा। इसका संहार भगवान विष्णु और शिव ने मिलकर किया, लेकिन हलाहल को मारने के बाद दोनों में घमंड आ गया। इससे मां आदि शक्ति का जो तेज उनमें समाहित था, समाप्त हो गया। दोनों निस्तेज हो गए। देवी ने उनका काम ब्रह्मा को सौंप दिया, लेकिन सृष्टि का संचालन प्रभावित होने लगा। इस पर ब्रह्मा ने मां आदि शक्ति से प्रार्थना की कि वे भगवान विष्णु और शिव को पुन: तेजवान बना दें। उनकी करुण प्रार्थना से द्रवित होकर मां ने लक्ष्मी और पार्वती के स्वरूप को प्रकट करने की घोषणा की। इधर, देवी भक्त हिमाचल की तपस्या से प्रसन्न देवी ने उनके यहां बेटी के रूप में जन्म लेने का निर्णय लिया। इससे पहले उन्होंने हिमाचल राज के यहां प्रकट होकर उन्हें योग के महत्व से अवगत कराया, जिससे वे हर तरह से शुद्धि प्राप्त कर लें।

हनुमान चालीसा से श्रोताओं ने किया ध्यान
कथा के दौरान पंडित मेहता ने श्रोताओं को हनुमान चालीसा के माध्यम से मेडिटेशन का अभ्यास भी कराया। उन्हाेंने बताया कि यह अभ्यास मानस यज्ञ के समान है। सुबह सोकर उठने के बाद और रात में सोने से पहले सांस के आवागमन के माध्यम से इस मेडिटेशन को करने से व्यक्ति के व्यक्तित्व में निखार आता है, जो उसके विकास में सहायक सिद्ध होता है।

श्रीमद् देवी भागवत महापुराण में कथा का बखान करते पं. विजयशंकर मेहता और उपस्थित श्रद्धालु।

जीवन में खुशियां बिखेरती है मुस्कान
इस अवसर पर उन्होंने बीच-बीच में श्रोताओं को मुस्कुराहट के फायदे बताते हुए कुछ हास्य प्रसंग छेड़ जमकर हंसाया। उएक-दूसरे के प्रति अविश्वास की भावना बढ़ती जा रही है। ऐसे में एक छोटी सी मुस्कान ही है, जिसे अपना कर हम न सिर्फ स्वयं खुश रह सकते हैं, बल्कि परिवार और हमसे मिलने वाले हर एक व्यक्ति को खुशी का उपहार दे सकते हैं।

चार शारीरिक और चार मानसिक प्राणायाम
योग के 8 चरण हैं। इसमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान व समाधि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यम के पांच भाग सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य व अपरिग्रह हैं। इसी तरह नियम के भी पांच भाग हैं, जिसमें शुद्धि, संतोष, तप, जप व समर्पण शामिल हैं। इसमें चार शारीरिक और चार मानसिक प्राणायाम। इंद्रियों को बाहर से अंदर लगाना प्रत्याहार है।

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