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उत्पीड़न की स्थिति में सोचने से बेहतर है, कदम उठाया जाए

5 वर्ष पहले
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अपने फैसलों पर शक हो या पाना हो स्टाफ का भरोसा तो ये तरकीबें
क्या आप एक बार फैसला कर लेने के बाद बार-बार उस पर विचार करते हैं या इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि फैसला सही किया या नहीं। हालांकि संशय की स्थिति से तो सभी को कभी न कभी गुजरना पड़ता है, लेकिन अगर अक्सर ऐसा होता है तो यह लीडरशिप क्षमता को प्रभावित कर सकता है। इससे दूसरों के मन में आपके प्रति गलत धारणा भी बनती है। अगर अपने किसी फैसले पर भरोसा नहीं हो रहा है तो इस इन्ट्यूशन पर ध्यान देना चाहिए। हाल ही में किए अपने किसी फैसले पर विचार करके इसे समझा जा सकता है। उम्मीद है कि पाएंगे कि इंन्ट्यूशन या मन से आई अावाज सही दिशा में ले जा रही थी। यहां तक कि जब गलती हुई तब भी संकेत मिले थे, जिसे रोका भी जा सकता था। फैसलों पर संशय की स्थिति से निकलने का एक तरीका और है कि फैसले की समीक्षा की सुनिश्चित योजना बनाई जाए। तय समय बाद अपने फैसले की समीक्षा की जाना चाहिए।

(केरोलेन ओ हारा के ‘स्टॉप सेकेंड-गेसिंग योन डिसिजन एट वर्क’ से)

यह है म्यांमार का श्वेडगोन टेम्पल। इसे फोटाग्राफी के लिए म्यांमार का सबसे अच्छा स्थान माना जाता है। यह टेम्पल सिंगतारा हिल पर स्थित है और इसे गोल्डन पगोडा या ग्रेट डागोन पगोडा भी कहा जाता है। यह फोटो नेशनल जियोग्राफिक के लिए योर शॉट कम्यूनिटी के मेम्बर ब्रेट रायलेंस ने लिया है। यंगून की रात की चहल-पहल के बीच टेम्पल की चमक अलग ही नजर आ रही है।

जोहाना हाना आरेंट
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