गांवों में शराबबंदी, यहां 66 वार्डों में 21 शराब दुकानें और इतने ही बार
भले ही शासन शराब पीने की सुविधा देने वाले बार को कम करने के मकसद से नई आबकारी नीति बनाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन न्यायधानी कहे जाने वाले बिलासपुर शहर के 66 वार्डों में 21 शराब दुकानें और इतने ही बार हैं। शहर की ऐसी कोई सड़क नहीं बची, जहां आधी रात तक पीने-पिलाने का इंतजाम न हो। कुछ इलाके तो ऐसे हैं, जहां की आबादी कम है और उसके लिहाज से बार और दुकानें ज्यादा हैं। उधर, गांवों में शराबबंदी की बात कही जा रही है।
प्रदेश के अन्य जिलों की तरह यहां भी नए शराब ठेके को लेकर तैयारी चल रही है। आबकारी विभाग का स्थानीय अमला नए शराब ठेके को लेकर अभी से सक्रिय है। यहां शराब के शुल्क में कोई कमी न आए, इसलिए शराब ठेकेदारों को साधा जा रहा है। उनके साथ बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। कुछ दुकानों के उठाव को लेकर भी अधिकारी चिंतित है, पर नई आबकारी नीति को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इसमें बारों की संख्या घटाने के बारे में गंभीरता से विचार किया जा रहा है। जिले के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में वैसे भी एक भी बार नहीं है, पर शहर से लगे इलाकों में बार है। यहां मोटी रकम लेकर खिलाने-पिलाने की सुविधा मिलती है। वहां बड़े होटल वालों ने लाइसेंस ले रखा है। 66 वार्डों में फैले शहर में एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 21 बार हैं। शेष पेज|18
जिले में कुल 71 में से 21 दुकानें शहर में हैं। इनमें 10 देसी तो 11 अंग्रेजी शराब दुकानें हैं। यहां रोजाना लाखों रुपए की शराब बेची जाती है। रसूखदारों और वीआईपी होटलों की वजह से अब शहर में शायद ही ऐसी कोई सड़क है, जहां आधी रात तक बारों में पीने-पिलाने का इंतजाम न हो। कुछ बार मुख्य द्वार बंद कर दूसरे गेट से ग्राहकों के आने-जाने का इंतजाम करते हैं। इसके बाद रोड पर एक्सीडेंट, विवाद और मारपीट आम बात है। न पुलिस इस पर रोक लगा पा रही और न आबकारी अमला। शराब पीकर लोग बीच सड़क पर हुल्लड़ मचाते हैं और आबकारी विभाग के अधिकारी घर पर सोते रहते हैं। शहर में कुछ दुकानों और बार का विरोध भी हो रहा है लेकिन आबकारी विभाग इन्हें बंद कराने बिल्कुल रुचि नहीं ले रहा। जिले की सलाहकार समिति की बैठक औपचारिक बनकर रह गई है। ग्रामीण इलाकों में शराबबंदी के लिए अभियान चलाया जा रहा है लेकिन शहर में बढ़ती अवैध शराब बिक्री व सर्विस पर रोक नहीं लगाई जा रही है।
20 करोड़ बढ़ा लक्ष्य, बेचनी होगी 296 करोड़ की शराब
पिछले साल 276 करोड़ रुपए की शराब बिक्री का टारगेट था जिसे 20 करोड़ रुपए बढ़ाकर 296 करोड़ कर दिया गया है। पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले टारगेट कम बढ़ाया गया है। पिछले साल 16 प्रतिशत वृद्धि की गई थी जबकि इस बार करीब 7 फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है।
पुराने बस स्टैंड के पास आधा दर्जन से ज्यादा बार
शहर में पुराने बस स्टैंड के पास आधा दर्जन से ज्यादा बार है। कुछ तो 100 मीटर की दूरी पर भी नहीं है। वहीं कुछ 200 मीटर की दूरी पर है। नया बस स्टैंड बनने के बाद भी बार में शराब के व्यवसाय में कमी नहीं आई है। होटलों या बार में लोगों को देर रात तक शराब पीने की सहूलियत मिल रही है।
अफसर बार में नहीं जाते छापा मारने
आबकारी अधिनियम के अनुसार शराब दुकानें रात 10 और बार रात 10.30 बजे बंद हो जाने चाहिए। शराब दुकानें सड़कों पर होने से बंद हो जाती हैं, लेकिन बार आधी रात तक चलते हैं। अक्सर अधिकारी शराब दुकानों और ढाबों की जांच करते हैं, बार तो बहुत कम जाते हैं या फिर जाते ही नहीं।
भीड़ भरे इलाके में स्थित एक व्यावसायिक परिसर की शराब दुकान।
रात में कुछ बार मेन गेट बंद कर पीछे के दरवाजे से ग्राहकों के आने-जाने का करते हैं इंतजाम
शहर में घट सकती है बार की संख्या
इस बार कुछ बार संचालक घाटे की वजह से रिनीवल नहीं करा पाएंगे। ऐसी सूचना मिल रही है। ऐसा हुआ तो वे बार नहीं चला सकेंगे और शहर में बार की संख्या घट जाएगी। हालांकि इस बारे में अभी फाइनल कुछ नहीं कहा जा सकता। आबकारी अमला शराब दुकानों के साथ ही बार में भी जाकर जांच करता है। अनियमितता मिलने पर कार्रवाई भी करते हैं।\\\'\\\' -पीसी अग्रवाल, प्रभारी सहायक आयुक्त, आबकारी
शहर के बाहर
शहर के भीतर
जिले में बार
01
एफएल फोर
04
एफएल थ्री होटल बार
02
एफएल थ्री क मॉल बार
19
एफएल थ्री होटल बार