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मां की हथेली में ममता की शक्ति

5 वर्ष पहले
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मां के हाथों से बनी रोटी खाकर बच्चे बनेंगे संस्कारवान
मां की हथेली में ममता की शक्ति होती है। बच्चे के भविष्य को संवारने में उस शक्ति का विशेष महत्व है। इसलिए मां घर में कोई काम करे या न करे, उसे अपने हाथों से आटा जरूर गूंदना चाहिए। लिंक रोड स्थित आनंद भवन सुमंगल परिसर में चल रहे श्रीमद् देवी भागवत कथा में प्रवचन करते हुए ये बातें व्यासपीठाचार्य पं. विजय शंकर मेहता ने कहीं।

कथा के पांचवें दिन व्यासपीठाचार्य ने श्रीमद् देवी भागवत महापुराण के 8वें व 9वें स्कंध की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि घर को जोड़ने का काम चौका करता है। चौके की गरिमा मां पर निहित है। पुरुष और स्त्रियां एक समान हैं, लेकिन प्रकृति ने स्त्री में एक अतिरिक्त लक्षण गर्भ धारण का दिया है। यह मानवता का सृजन केंद्र है। यही गुण उन्हें मां का दर्जा देकर महान बनाती हैं। मां के हाथों में प्रेम, ममता का रस होता है, यही कारण है कि मां को स्वयं आटा गूंदना चाहिए, जिससे उस रस का पान बच्चे करें और आदर्श व संस्कारवान बन सकें। वर्तमान में इसका उल्टा हो रहा है। वे जिस भाव से रोटियां बनाते हैं, वही भाव बच्चों में आता है और यही वजह है कि संतानों में मानवता का गुण धूमिल होता जा रहा है। आयोजन में केशर देवी अग्रवाल, सुभाषचंद्र अग्रवाल, सुमन अग्रवाल, सागरमल अग्रवाल, द्वारका प्रसाद अग्रवाल, उमाशंकर अग्रवाल, ऋषिराम अग्रवाल, मनोज अग्रवाल समेत कोसलिया परिवार के अन्य सदस्य जुटे हैं।

तो हनुमानजी को करें याद
देवियों ने किया प्रकृति का निर्माण

व्यासपीठाचार्य ने कहा कि हनुमान परिवार के देवता हैं। उनकी आराधना से परिवार में सुख-शांति आती है। जब पति-प|ी में तालमेल न हों, उनमें दूरियां हों या किसी अन्य प्रकार के वियोग की स्थिति बन रही हो तो हनुमंत अाराधना फलदायी होती है।

9वें स्कंध पर प्रवचन करते हुए कहा कि प्रकृति का निर्माण पांच देवियों दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, सावित्री और गायत्री ने मिलकर किया है। देवियों से विभिन्न देवियों के स्वरूप का भी प्राकट्य हुआ। इनमें गंगा, तुलसी, नागेश्वरी, मंगल चंडी, काली समेत अन्य देवियां शामिल हैं।

प|ी के बिना पुरुष अधूरे

व्यासपीठाचार्य ने कहा कि प|ी के बिना पति अधूरे माने गए हैं। यह स्थिति देवी-देवताओं में भी लागू होती है। यही कारण कि पूजा-अर्चना में देव की प|ी मानी गईं देवियों को भी जोड़ा गया है। उन्होंने देवताओं और उनकी प|ियों के बारे में बताते हुए कहा कि वायु की प|ी सस्ती, अग्नि की प|ी स्वाहा, यज्ञ की दक्षिणा, पितृ की सुधा, सत्य की सती, ज्ञान की बुद्धि, मेधा, धृवी, काल की प|ी संध्या, रात्रि, दिन, लोभ की क्षुधा, पिपासा, वैराग्य की श्रद्धा, भक्ति प|ी हैं।

लिंक रोड स्थित सुमंगल परिसर में आयोजित भागवत कथा के दौरान आरती करते श्रद्धालु।

पं. विजयशंकर मेहता।

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