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इमलीपारा के 91 रसूखदार व्यापारियों को आज देना ही होगा निगम को जवाब

5 वर्ष पहले
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नगर निगम पर बेवजह परेशान करने का आरोप
इमलीपारा के व्यापारियों ने नगर निगम प्रशासन पर आरोप लगाया है कि उन्हें जमीन खाली करने के लिए बेवजह परेशान किया जा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि हाईकोर्ट के जिस आदेश का हवाला दिया जा रहा है, वह दो व्यापारियों की व्यक्तिगत याचिका है। इसमें सभी से जवाब और दस्तावेज मांगा जाना गलत है।

व्यापारी नगर निगम की नोटिस से अत्यधिक खफा हैं। नगर निगम की पिछले 7-8 महीनों से चली आ रही कार्रवाई में अलग-अलग मामलों में कोर्ट के निर्देश नगर निगम को मिले हैं। हाल ही में जो नोटिस व्यापारियों को दिया गया है, उसमें डब्ल्यूपीसी क्रमांक 162/2016 के परिपालन में जवाब पेश करने के लिए कहा गया है। पुराना बस स्टैंड इमलीपारा व्यापारी संघ के अध्यक्ष जसपाल अजमानी का कहना है कि निगम प्रशासन ने एक याचिका के संदर्भ में सभी लोगों से जवाब मांगा है। इसी में दूसरे अन्य आदेश का हवाला भी दे दिया है। इस तरह का नोटिस सरासर गलत है। इसमें 86 लोगों से जवाब मांगा गया है। सभी से दस्तावेज मांगे गए हैं, जबकि व्यापारियों ने तो दस्तावेज पहले ही जमा करवा दिए हैं। बार-बार दस्तावेज मांगकर व्यापारियों को मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा है।

इमलीपारा में व्यापारियों ने नोटिस का जवाब देने बैठक की।

सड़क चौडीकरण के लिए दुकानों को तोड़ने की जरूरत पड़ रही है।

इन रसूखदारों का है सरकारी जमीन पर कब्जा
नगर निगम की सरकारी दुकानों पर कब्जा करने में जीत कांटीनेंटल, सिटी सेंटर, सत्या ऑटो मोबाइल, रामा ट्रेड सेंटर, कार शो रूम, शेवरलेट कार सर्विस सेंटर, प्ले हाउस, होटल रीगल, सत्य सांई प्लाजा, अली अहमद बस, आनंद फर्नीचर, जगन्नाथ मंगलम व महामाया सेल्स आदि शामिल हैं। इनमें जीत कांटीनेंटल के ऊपर 50 फीट और सिटी सिटी सेंटर पर करीब 20 फीट जमीन करने का आरोप है।

नगर निगम के लिए डेडलाइन है 28 फरवरी
इमलीपारा मामले में कोर्ट में पिछली सुनवाई 28 जनवरी को हुई थी। इस दिन कोर्ट ने सरकारी जमीन चिह्नांकित करने के साथ ही जवाब पेश करने निगम को 4 सप्ताह का समय दिया था। इस लिहाज से यह समय फरवरी की आखिरी तारीख को पूरा हो जाएगा। यही वजह है कि निगम ने भी व्यापारियों को जवाब पेश करने के लिए 15 फरवरी तक का समय दिया है, ताकि इसके बाद वे भी कोर्ट में जवाब देने के लिए अपनी तैयारी कर सके।

व्यापारियों को दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए 14 फरवरी तक का समय दिया गया है। इनका जवाब आने के बाद ही निगम अपना जवाब कोर्ट में पेश करेगा। - जुगल सिंह, प्रभारी अधिकारी, नगर निगम

14 फरवरी तक का समय

निगम ने सख्ती दिखाई तो कुछ व्यापारी चले गए हाईकोर्ट
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