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फर्जी नल लगाया, जांच के निर्देश

5 वर्ष पहले
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पीएचई विभाग में एनआरडीडब्ल्यूपी के तहत 15 स्थानों पर फर्जी नल लगाने की शिकायत हुई है। सीई ने एक्जीक्यूटिव इंजीनियर को इसका भौतिक सत्यापन करने का निर्देश दिया है। सीई ने टीम का गठन कर इसमें रिपोर्ट पेश करने की बात कही है। उनके मुताबिक जांच के बाद स्पष्ट हो पाएगा कि यह गलत है सही, जिसकी रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी जाएगी।

डीबी स्टार टीम ने खबर में बताया था कि राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम में रकम डिफरेंस का खुलासा हुआ था। यह गड़बड़ी रायपुर की प्रेमचंद कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद मिली थी। सरकार ने इन्हें वर्ष 2014-15 के सरकारी मदों में अंकेक्षण की जिम्मेदारी सौंपी थी, जिन्होंने लापरवाही पर आपत्ति उठाकर इसकी जानकारी ईएनसी को दी। इसके बाद ईएनसी ने बिलासपुर और राजनांदगांव के ईई को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। खबर में यह भी बताया गया था कि राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना के तहत गांवों में नलकूप, बोर और टंकी निर्माण करा रहा है। इसके लिए इन्हें करोड़ों रुपयों का बजट भेजा गया है। मंशा यह कि गांवों में पानी की कमी और दूसरी दिक्कतें न हों और जिन स्थानों पर इसकी कमी है, उसे डिपार्टमेंट के अधिकारी दूर करें। इस योजना के तहत ही शहर में जल आवर्धन योजना के लिए कई जगहों पर सीमेंट की टंकी और पाइप लगाकर करोड़ों रुपए फूंके गए हैं, पर इससे पानी सप्लाई का काम शुरू नहीं हो सका है। हैरानी की बात कि इस बात को लेकर पीएचई और नगर निगम आमने-सामने हैं। दोनों एक-दूसरे पर गलती मढ़कर मामले से पल्ला झाड़ लेते हैं, जिसके कारण पब्लिक को शासन की योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यही वजह है कि यहां अव्यवस्था का माहौल है। इधर, फर्जी नल लगाने की शिकायत ने विभाग में नए विवाद को जन्म दिया है। इसमें भी अधिकारी जगहों का नाम छुपा रहे हैं। वे ऐसा क्यों कर रहे हैं, इसका जवाब इनके वरिष्ठ अधिकारियों के पास भी नहीं है। उनके मुताबिक रिपोर्ट के बाद कुछ कहा जा सकता है।

शिकायत मिली है जांच करवा रहे हैं
जिले में 15 स्थानों पर फर्जी नल लगाने की शिकायत मिली है। इसके लिए टीम का गठन कर मामले की जांच कराई जा रही है। इसमें जो भी रिपोर्ट आएगी, उसे वरिष्ठ अधिकारियों के पास भेजा जाएगा। इससे ज्यादा मामले में कुछ नहीं कहा जा सकता है।’’ -यूके राठिया, ईई, पीएचई डिपार्टमेंट, बिलासपुर

इय नियम का पालन करना अनिवार्य, अनदेखी हुई
सरकार ने योजना में लापरवाही या शासकीय मदों में पारदर्शिता के दृष्टिकोण से वेबसाइट बनाई है। यह अधिकारियों की एंट्री के लिए महीने में 15 दिन खुलती है। उन्हें इसमें प्रोजेक्ट के बजट के साथ कब, कहां भुगतान और किसे किया, इसकी जानकारी देनी पड़ती है। पीएचई विभाग में भी इसे लागू किया गया है, पर अफसर डाटा एंट्री ऑपरेटर की कमी बताकर काम में लापरवाही करते हैं, जबकि सरकार ने इसे ऑनलाइन करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए हैं। दूसरा पहलू यह भी कि इससे रुपयों के फर्जीवाड़ा का पता चल जाता है। इसके बाद इनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।

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