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सिलेंडर से चल रही वैन, आरटीओ का रवैया उदासीन

5 वर्ष पहले
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शहर और आस-पास एक नजारा आम है, वह है वैन से स्कूल आते-जाते बच्चे। पैरेंट्स यह जानने की कोशिश नहीं करते कि वे नौनिहालों को जिस वाहन में भेजते हैं, वह पेट्रोल, डीजल से चल रहे हैं या फिर गैस किट वाले वाहन से। इसके अलावा आस-पास के क्षेत्रों में भी गैस किट लगी गाड़ियां चल रही हैं। दरअसल, गैस किट वाले वाहनों में घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग किया जाता है। ये गैरकानूनी है। इससे हादसे की आशंका बनी रहती है। इसके बाद भी पूरे शहर में यह गोरखधंधा खुलेआम चल रहा है।

पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ने से चारपहिया वाहन चालकों ने खर्च कम करने की नई तरकीब निकाल ली है। पहले वाहन एक-दो साल चलने के बाद लोग उसमें गैस किट लगवाते थे। अब ऐसा नहीं है। लोग नई गाड़ी खरीदने के तुरंत बाद इसमें गैस किट लगवा लेते हैं। इसकी कीमत 22 हजार रुपए से शुरू होती है। आरटीओ-इंश्योरेंस के साथ इसकी कीमत 28 हजार रुपए हो जाती है। हालांकि बहुत कम लोग ही । नियम के अनुसार इस गैस किट में सीएनजी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, लेकिन इसका पालन नहीं किया जाता। चारपहिया वाहन मालिक इसमें सीएनजी के बजाय घरेलू गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं। एक से वाहनों में बड़ी संख्या वैन की भी है। डीबी स्टार को लगातार इस संंबंध में जानकारी मिल रही थी कि वैन चालक गाड़ियों में घरेलू गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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