जिस संचालक मंडल ने कराया उजागर, 61 लाख के घोटाले में उनके हाथ ही रंगे मिले
बर्खास्त ब्रांच मैनेजर, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष समेत 6 के खिलाफ जुर्म दर्ज
सहकारी सेवा समिति मर्यादित बैंक सेमरताल के जिस संचालक मंडल ने 61 लाख रुपए की गड़बड़ी उजागर कराई, उनके हाथ ही इस घोटाले में रंगे मिले हैं। डिप्टी रजिस्ट्रार की ऑडिट रिपोर्ट और अनुशंसा के आधार पर कोनी पुलिस ने बर्खास्त ब्रांच मैनेजर बलदेव धीवर, संचालक मंडल के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष समेत 6 लोगों के खिलाफ जुर्म दर्ज कर लिया है। मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
सेमरताल सेवा सहकारी समिति मर्यादित बैंक का घोटाला 8 माह पहले उस समय फूटा था, जब संचालक मंडल के अध्यक्ष ने मनिंदर सिंह ठाकुर, उपाध्यक्ष राजकुमार साहू ने रजिस्ट्रार के पास ब्रांच मैनेजर रहे धीवर पर सवा करोड़ रुपए के गबन का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। मामला सामने आने पर रजिस्ट्रार ने धारा 53ख के तहत बैंक मैनेजर धीवर को बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद ही ग्रामीणों को बचत बैंक में उनकी रकम नहीं होने का पता चला। मामले की अभी जांच चल रही है। शेष पेज|15
कलेक्टर अन्बलगन पी के आदेश पर 5 सदस्यीय टीम ने 2015 की आॅडिट पूरी कर ली है। इसमें 61 लाख रुपए गबन की पुष्टि हुई है। कोनी पुलिस ने मंगलवार को उप पंजीयक अरुण कुमार शर्मा पिता ईश्वर प्रसाद शर्मा 44वर्ष की रिपोर्ट पर सेमरताल बैंक के बर्खास्त मैनेजर धीवर, अध्यक्ष ठाकुर, उपाध्यक्ष साहू, सरकंडा शाखा के प्रबंधक सीताराम साहू, सुपरवाइजर नारायण प्रसाद पाठक, आपरेटर मीनू साहू के खिलाफ धारा 409, 406, 408, 120बी के तहत जुर्म दर्ज कर लिया। पुलिस ने धीवर व उपाध्यक्ष साहू को गिरफ्तार कर लिया है।
फोटोकापी में आडिट रिपोर्ट स्पष्ट नहीं
आडिट रिपोर्ट 107 पन्ने की है। पुलिस को इसकी फोटो कापी दी गई है। कोनी पुलिस के अनुसार फोटो काफी क्लियर नहीं है। स्याही कम होने के कारण वह स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा है। ओरिजनल लेकर ही आगे की जांच की जाएगी।
ऑडिट रिपोर्ट में अनियमितता व गबन का जिक्र
पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के लिए जो पत्र मिला है, उसके साथ आडिट रिपोर्ट भी है। पत्र में सेवा सहकारी समिति सेमरताल, पंजीयन क्रमांक 416 के वर्ष 2014-15 के लेनदेन में गंभीर अनियमितता व गबन का जिक्र है।
धीवर भागा तो खुल गया राज
बैंक में ग्राहकों को चार माह से बचत खाते से रकम नहीं दी जा रही है। बैंक का मैनेजर धीवर दस्तावेज लेकर फरार हो गया था। बैंक में महीनों से आडिट नहीं हुई थी। संचालक मंडल ने इस संबंध में प्रबंधक से पूछा तो वह स्पष्ट जवाब नहीं दे पाया। शिकायत उपपंजीयक से की गई और मैनेजर को हटाने का निर्देश जारी कर दिया गया। बाद में रकम का मिलान हुआ तो सवा करोड़ रुपए की गड़बड़ी सामने आ गई।
आॅडिट में ही माहभर बीत जाएगा
पुलिस ने अभी तक किसी का बयान रिकार्ड नहीं किया है। इसमें खातेदारों का कथन लेना है। कोनी टीआई डिंगेश्वर दीवान का कहना है कि उनके बयान व विवेचना के बाद ही गिरफ्तारी शुरू होगी। पुलिस को अभी 61 लाख रुपए के दो चेक मिले हैं। बैंक में 2012 से आडिट नहीं हुई है।
अध्यक्ष के हस्ताक्षर से निकले 38 लाख
चेक में अध्यक्ष, ब्रांच मैनेजर व मेन ब्रांच के सुपरवाइजर के हस्ताक्षर से रकम निकलती है। सहकारिता विभाग की पांच सदस्यीय टीम ने दो दिन में सरकंडा आफिस के ऊपर के एक कमरे में बैठकर सालभर के कागजात की आडिट की। कुल 61 लाख का गबन सामने आया। इसमें अध्यक्ष मनिंदर सिंह के हस्ताक्षर से 38 लाख रुपए व उपाध्यक्ष राजकुमार साहू 22 लाख रुपए निकाले जाने की पुष्टि हुई है। पुलिस ने बैंक मैनेजर बलदेव धीवर को मुख्य आरोपी बनाया है, क्योंकि सरकारी कर्मचारी होते हुए भी बिना प्रस्ताव के चेक में हस्ताक्षर किया है।
बिना प्रस्ताव के निकली रकम
बैंक से रकम निकालने संचालक मंडल की कमेटी बनी है। बैंक मैनेजर इसका पदेन सचिव होता है। बैंक से रकम निकालने कमेटी के प्रस्ताव की कापी जरूरी है। इस प्रकरण में मेंबर के बिना प्रस्ताव के ही कभी मैनेजर, कभी अध्यक्ष तो कभी उपाध्यक्ष ने चेक से रकम निकाल ली। चेक सेमरताल बैंक से मेन ब्रांच सरकंडा पहुंचा तो यहां के मैनेजर समेत कर्मचारियों ने पास कर दिया।
गबन में किसका, क्या राेल था
अध्यक्ष मनिंदर सिंह- 38 लाख रुपए के चेक में बिना प्रस्ताव के हस्ताक्षर।
उपाध्यक्ष राजकुमार साहू- अध्यक्ष की गैरमौजूदगी में चेक में हस्ताक्षर कर 22 लाख निकलवाए।
बलदेव धीवर- सेमरताल बैंक का मैनेजर और पदेन सचिव रहते हुए भी प्रस्ताव पास नहीं कराया।
बैंक मैनेजर शाखा सरकंडा सीता राम साहू- प्रस्ताव देखे बिना ही पेमेंट कर दिया।
लिपिक व कंप्यूटर ऑपरेटर मीनू साहू- बिना प्रस्ताव देखे ही पेमेंट के लिए किया पेश।
सुपरवाइजर सरकंडा ब्रांच नारायण प्रसाद पाठक - बिना प्रस्ताव देखे ही चेक में हस्ताक्षर कर दिया।