पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Chhattisgarh
  • Bilaspur
  • राजधानी में लगेंगे एलएचबी कोच, यात्रा होगी सुरक्षित और 100 बर्थ भी बढ़ेंगी

राजधानी में लगेंगे एलएचबी कोच, यात्रा होगी सुरक्षित और 100 बर्थ भी बढ़ेंगी

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
राजधानी एक्सप्रेस का सफर और लग्जरी होने जा रहा है। बिलासपुर से दिल्ली तक के सफर में मुसाफिरों को जरा भी थकान महसूस नहीं होगी। ऐसा राजधानी एक्सप्रेस को पुरानी बोगियों के बजाय अत्याधुनिक लिंक हॉफमैन बुस (एलएचबी) बोगियों के साथ चलाने से होगा। नार्दर्न रेलवे (दिल्ली) ने बोगियों में बदलाव का प्रस्ताव दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे को भेजा था, ताकि इसके मेंटेनेंस में दिक्कत न हो। जोन ने इस पर मुहर लगा दी है। अब राजधानी एक्सप्रेस को मार्च से नई बोगियों के साथ चलाने की तैयारी है। खासियत यह है कि बोगियों की संख्या 18 ही रही तो भी 100 और यात्रियों के लिए बर्थ उपलब्ध होंगी।

बिलासपुर से दिल्ली तक चलने वाली राजधानी एक्सप्रेस कन्वेंशनल यानी परंपरागत बोगियों के साथ चल रही है। बीते 15 सालों में बोगियों की डिजाइन में भारी बदलाव हुआ है, लेकिन छत्तीसगढ़ की राजधानी एक्सप्रेस इस सुविधा से वंचित रही है। अब इस ट्रेन को और ज्यादा लग्जरी बनाने का फैसला हुआ है। दरअसल, पुरानी बोगियां कंडम हो गई हैं, जिसे लेकर यात्री बार-बार शिकायत करते रहे हैं। ट्रेन नार्दर्न रेलवे की है। लिहाजा, कोच बदलने से पहले हमारे जोन से पूछा गया। कारण भी है कि एलएचबी कोच का मेंटेनेंस अलग तरह से होता है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने नार्दर्न रेलवे को बता दिया है कि यहां एलएचबी बोगियों की प्राइमरी मेंटेनेंस हो रहा है। बिलासपुर-बीकानेर और बिलासपुर-भगत की कोठी, दो ट्रेनें एलएचबी बोगियों के साथ चल रही हैं। जोन की सहमति के बाद राजधानी एक्सप्रेस की बोगियों को बदला जाना लगभग तय हो गया है। अफसर मार्च तक बदलाव हाेने की बात कह रहे हैं।

एलएचबी को जानिए: लिंक हॉफमैन बुस (एलएचबी) जर्मनी की कंपनी है। इसकी तकनीक को भारत में आयात किया गया है। लिहाजा, बोगियों को एलएचबी कहा जाता है। बोगियों को एंटी टेलिस्कोपिक डिजाइन से बनाया गया है, ताकि बोगियां टकराने पर एक-दूसरे पर न चढ़ें।

760 के बजाय 860 यात्री करेंगे सफर
यह है एलएचबी कोच, जिसे राजधानी एक्सप्रेस में लगाया जाएगा। वर्तमान में इन बोगियों के साथ चल रही है ट्रेन।

राजधानी परंपरागत बोगियों के साथ चल रही है, जिसके एसी 1 में 18, एसी टू में 46 और एसी थ्री टायर में 64 बर्थ होती हैं। एलएचबी कोच के एसी फर्स्ट में 24, एसी टू में 52 और एसी थ्री टायर में 72 बोगियां रहती हैं। राजधानी एसी फर्स्ट की 1, एसी टू की 5 और एसी थ्री टायर की 8 बोगियों के साथ चल रही है। एलएचबी कोच लगे तो इतनी ही बोगियों में 100 बर्थ और बढ़ जाएंगी। यानी कि पूरी ट्रेन में 760 के बजाय 860 यात्री एक साथ सफर कर सकेंगे।

नार्दर्न रेलवे के प्रस्ताव पर जोन की मुहर, अगले माह से नए कोच के साथ चलाने की तैयारी
नई बोगी की खूबियां
सामान्य बोगियां से 10 टन हल्की।

बोगी के टॉयलेट वाले हिस्से को कमजोर बनाया गया है, टकराने पर झटका इसी भाग में रहेगा और ट्रेन पलटेगी नहीं।

डिस्क ब्रेक लगे हैं, सामान्य बोगियों की तुलना यह 300 मीटर पहले ठहर जाएगी।

एसी माइक्रो प्रोसेसर से कंट्रोल होता है, जिसके कारण भीतर का साउंड 100 से घटकर 60 डेसीबल हो जाता है।

अतिरिक्त शॉकअब लगे हैं, जो चलने और रुकने पर जर्क को कम करता है।

काेच में खाना ठंडा-गर्म रखने की सुविधा।

खबरें और भी हैं...