धन की शुद्धि दान से: पं. मेहता
धन की शुद्धि दान से होती है। मां लक्ष्मी का एक रूप धन है। जिस तरह हम अपनी मां, बेटी को सहेजते हैं, उन्हें किसी ऐसे स्थान में जाने से रोकते हैं, जहां उन्हें नहीं जाना चाहिए, ठीक उसी तरह लक्ष्मी स्वरूपा धन को भी कहीं भी खर्च नहीं कर देना चाहिए। लिंक रोड स्थित आनंद भवन सुमंगल परिसर में चल रहे श्रीमद् देवी भागवत कथा पर प्रवचन करते हुए ये बातें व्यासपीठाचार्य पं. विजय शंकर मेहता ने कहीं।
कथा के 6वें दिन व्यासपीठाचार्य ने श्रीमद् देवी भागवत महापुराण के 9वें स्कंध की कथा सुनाई। इसमें उन्होंने राम-सीता, द्राेपदी, तुलसी, शंखचूड़ प्रसंग, सावित्री-सत्यवान-यमराज, समुद्र मंथन, भगवती स्वाहा, स्वधा, दक्षिणा, भगवती षष्ठी, मंगल चंडी, मनसा देवी समेत अन्य प्रसंगों पर रोचक कथा सुनाई। इसी क्रम में समुद्र मंथन प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने मां लक्ष्मी के प्राकट्य व दिव्य स्वरूप का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मां लक्ष्मी के प्रकट होते ही देव-दानव में हर्षोल्लास छा गया। दोनों पक्ष प्रार्थना में जुट गए कि मां उनके पास आएं। इसी संदर्भ की व्यावहारिक व्याख्या करते हुए पंडित मेहता ने कहा कि मनुष्य का मां लक्ष्मी से मुख्य रूप से दो रूपों में संबंध है। एक मां और दूसरा बेटी का। जिस तरह हम अपनी मां और बेटी के सम्मान का ध्यान रखते हैं, उन्हें ऐसी जगह नहीं जाने देते जहां उन्हें नहीं जाना चाहिए, उसी तरह हमारे पास उपलब्ध धन रूपी लक्ष्मी के भी सम्मान का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लक्ष्मी का सम्मान करते हैं, लक्ष्मी भी उनका मान रखती है। हमें अपने धन को दुर्व्यसनों में खर्च न कर परोपकार में करना चाहिए। व्यासपीठाचार्य ने कहा कि दान के बिना धन की शुद्धि नहीं होती, अत: हमें अपने लाभ से हर हाल में कुछ अंश धर्म-कर्म व निर्धनों के लिए निकालना चाहिए। शक्तियों के विभिन्न स्वरूप हैं। परा शक्ति, ज्ञान शक्ति, इच्छा शक्ति, क्रिया शक्ति व कुंडलनी शक्ति। परा शक्ति, शक्ति का मूल आधार है। क्रिया का कारण ज्ञान शक्ति है। इच्छा शक्ति से इंद्रियां संचालित होती हैं। क्रिया शक्ति विचारों को क्रियान्वित करता है और कुंडलनी जीवन शक्ति कहलाती है। आयोजन में केशर देवी अग्रवाल, सुभाष चंद अग्रवाल, सुमन अग्रवाल, सागरमल अग्रवाल, द्वारका प्रसाद अग्रवाल, उमाशंकर अग्रवाल, ऋषिराम अग्रवाल, मनोज अग्रवाल सहित कोसलिया परिवार के अन्य सदस्य जुटे हुए हैं।
सुमंगल परिसर में देवी भागवत पर प्रवचन करते पं. विजयशंकर मेहता और उपस्थित श्रद्धालु।
माता से आशीर्वाद के रूप में मिलती है सकारात्मक ऊर्जा
पं. मेहता ने कहा कि गौ माता व जन्म देने वाली मां को वह शक्तियां प्राप्त हैं जिनमें 24 घंटे सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती है। अत: कोई भी व्यक्ति किसी काम को करने से पहले यदि दोनों माताओं को सच्चे मन से याद कर ले तो आशीर्वाद रूपी ऊर्जा उसे प्राप्त हो जाती है और वह पूरी शक्ति के साथ काम कर सकता है।
दिनभर में चार बार बदलती है पाॅजीटिव और निगेटिव ऊर्जा
व्यासपीठाचार्य ने कहा कि दिन में मानव तन में ऊर्जा शक्ति का लेबल चार बार बदलता है। सूर्योदय से एक घंटे पहले और एक घंटे बाद तक 100 प्रतिशत सकारात्मक ऊर्जा होती है। इसमें व्यक्ति जो भी काम करेगा, पूरे उत्साह व तन्मयता के साथ करेगा। दोपहर 12 से 2 के बीच पॉजीटिव एनर्जी का लेबल 50 प्रतिशत हो जाता है। शाम को 100 प्रतिशत नकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती है। इस बीच वह डिप्रेस्ड होता है, जबकि रात 10 बजे के बाद एक बार फिर शरीर में पॉजीटिव एनर्जी रिचार्ज होने लगती है।