भागवत में शब्द मूर्ति के रूप में हैं कृष्ण: डॉ. शर्मा
श्रीमद् भागवत में भगवान श्रीकृष्ण शब्द मूर्ति के रूप में विद्यमान हैं। इस कथा के श्रवण मात्र से सांसारिक कष्टों ने मुक्ति मिल जाती है।
ग्राम बिरकोना में ज्ञान यज्ञ समिति द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ में ये बातें व्यासपीठाचार्य डॉ. गिरधर शर्मा ने कही। उन्होंने कहा कि भागवत महापुराण मात्र महाकाव्य नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की साक्षात शब्दमयी प्रतिमूर्ति है। वेद स्वरूप कल्पवृक्ष का परिपक्व फल है। भगवान श्रीकृष्ण जब इस धरा को छोड़कर बैकुंठ के लिए प्रस्थान करते हैं तब अपने भक्तों को आश्रय देने के लिए सारी शक्ति श्रीमद भागवत महापुराण में प्रतिष्ठित कर दी। इसीलिए इस कथा के श्रवण मात्र से सांसारिक कष्टों का निवारण होता है। इससे पितर भी तरते हैं। यही कारण है कि वार्षिक श्राद्ध में यह कथा सुनने का प्रावधान है। इस अवसर पर उन्होंने धुंधकारी की कथा सुनाई।
कलशयात्रा निकली
श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ के पहले दिन कथा की शुरुआत कलश यात्रा से हुई। बाजे-गाजे के साथ महिलाएं व युवतियां भजन-कीर्तन करते हुए कलश यात्रा में शामिल हुईं।